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डॉक्टर एवं अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से मरीज परेशान: मनोज कुमार चौधरी…

सरायकेला Sanjay । सदर अस्पताल के ओपीडी के मरीजों की शिकायत पर भाजपा नेता सह पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी सदर अस्पताल पहुंचे। वहां की कुव्यवस्था देख कर काफी नाराज हुए। मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए लंबी लाइन में 2 घंटे से खड़े डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। मरीजों के साथ उनके परिजन चिलचिलाती धूप में दूर-दूर से आए हुए थे। लेकिन चिकित्सक दूसरे कामों में व्यस्त रहने के कारण नहीं देख रहे थे।

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श्री चौधरी ने तत्काल मरीजों को देखने की व्यवस्था बनाई। श्री चौधरी ने कहा कि सदर अस्पताल केवल रेफरल अस्पताल की भूमिका निभा रहा है। अधिकतर मरीजों को खानापूर्ति कर रेफर कर दिया जाता है। और अब तो ओपीडी के मरीजों को भी कोई सुविधा नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। सदर अस्पताल को भले ही तकरीबन 20 वर्ष पूर्व ही जिला अस्पताल का दर्जा मिल गया है लेकिन सुविधा के नाम पर अब भी अनुमंडल से ज्यादा कुछ भी प्राप्त नहीं है। सदर अस्पताल में कहने को तो बहुत सारी सुविधाएं मौजूद हैं लेकिन हकीकत इससे परे है। न सिर्फ चिकित्सक की कमी बल्कि स्वास्थ्यकर्मी सहित अन्य उपयोगी सामानों की कमी के कारण सदर अस्पताल किसी भी मायने में मानकों पर खरा नहीं उतर पाता है। अगर कहीं कोई बड़ी घटना घटित हो जाए तो उसे संभाल पाना सदर अस्पताल के बस की बात नहीं है।

वर्तमान छोटी-छोटी घटनाओं पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा अपना पल्ला झाड़ते हुए मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। अधिकतर प्रसूता महिलाओं को प्रसव के लिए निजी अस्पताल का रास्ता दिखाया जाता है। पिछले वर्ष उद्घाटित 6 बैड का आईसीयू सदर अस्पताल के बगल में मुंह चिढ़ा रहा है।

जिले में अब तक नहीं बन पाया बर्न यूनिट:-

आए दिन आग से जलने की घटना कहीं ना कहीं होती है। लेकिन जिले में आग से जलने वालों के समुचित इलाज के लिए अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है। एंबुलेंस की कमी, मरीजों की मुश्किलें जैसी सबसे बड़ी कमी सदर अस्पताल में एंबुलेंस की है। सुविधाविहीन सदर अस्पताल से रोजाना दर्जनों मरीज बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर होते हैं। लेकिन इन्हे दूसरे अस्पतालों में पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की बेहतर व्यवस्था नहीं। सिविल सर्जन से भी इस विषय में बात करने पर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाते हैं सदर अस्पताल उपाधीक्षक का तो कोई अता पता नहीं है यही स्थिति रही तो जल्द जनता के साथ आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

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