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आज भी राजघराना परंपरा को संयोज कर रखा है

प्रजा के सुख और शांति के लिए करते है तलवारबाजी…..

सरायकेला-खरसावां एक कला ऐतिहासिक भूमि रहा है । जहां छौ नृत्य के कई महानायक की उपन्न हुये है वही इस कला की नगरी में आज भी यहां के राजधराने अपनी 1536 ईवीं की पौराणिक परंपराओं को महाशक्ति मां पाउड़ी के उन शक्ति को सरायकेला और खरसावां राज परिवार के लोग आज भी संयोज कर रखा है । मां दुर्गा के सप्तमी रूप में यहां के राजपरिवार अस्त्र-सस़्त्र की पूजन करते है । इन तीन दिनों के दौरान अस्त्र-सस़्त्र पर हाथ तक नही डालते और दशमी को मां दुर्गा के विर्सजन के बाद राजकिृय परंपरानुसार राजपरिवार के सदस्य अस्त्र-सस़्त्र पुजन कर तलवार को चारो दिशा में लहराते नजर आते है .

राजकिृय परंपरानुसार राजपरिवार के सदस्य अस्त्र-सस़्त्र पुजन कर तलवार

                       राजा प्रताप आदित्यदेव (सरायकेला राजधराने वंशज)

    सरायकेला और खरसावां के ऐतिहास ने जिला को जीवित रखा है । यू कहे तो 1948 में स्वतंस्त्रता ने भारत में कई राजओं ने सरकार के नियमानुकुल अपना राज्य का विलय भारत में कर लिया था । परन्तु सराकेला और खरसावां स्टेड के राजा ने उनके नियमों को मानने से इंनकार कर आपने अनुसार नियमों के अनुसार विलय किया । इतिहास गवाह है 1 जनवरी 1948 की गोली काण्ड । सरकार से पूजा से संबंधित सरकार के एग्रीमेंट की राज में चल रहे सभी धार्मिक अनुष्ठान सरकार के अधीकृत देय राशि पर की जायेगी । तब से सरायकेला और खरसवां में सराकारी खर्च पर ही पुजा सपन्न होती है । वही राजधराने की दुर्गा पुजा का एक अपना ही महत्व है । जिसमें दोनों ही राजपरिवार के परंपरा सप्तमी से अस़्त्र-सस्त्र की पूजा से प्रारंभ होती है ।

 

 खरसावां राजधराने वंशज दिनों पुर्वजों के बनायें नियमों का पालन कर

और दसवीं के मां दुर्गा के विसर्जन से समापन होती है । इस दौरान राजपरिवार की परंपरा विशेष रही है । जहां लोग मां दुर्गा की विदायी सिन्दुर खेल कर करती है वही राजघराने के सदस्य मां के विदायी के बाद आज भी सदस्यों द्वारा शस्त्र प्रर्दशन कर प्रजा की सुरक्षा -शांति सुख समिद्ध का संकल्प लेता है । खरसवां के राजधराने के सभी सदस्य इन दिनों पुर्वजों के बनायें नियमों का पालन कर दशमी के दिन मां की विदायी के बाद अपने 350 वर्ष की पूजा परंपरा और संस्कार अनमोल विरासत रहे हैं, को आज भी संयोज कर रख है ।

             राजमाता विजया देवी (खरसावां राजधराने वंशज )

 

राजकुमार आनन्द सिंहदेव (खरसावां राजधराने वंशज )

 

 

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