
हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, मां को खोने के बाद बेटों ने उठाया जिम्मा — प्रशासन को दिखाया आईना

दुमका ब्यूरो मौसम गुप्ता की रिपोर्ट
दुमका : शहर के गोशाला रोड स्थित मुख्य नाली के किनारे एक परिवार ने वो कर दिखाया जो प्रशासन अब तक नहीं कर सका। मां को खोने के ग़म के बीच बेटों ने इंसानियत का ऐसा उदाहरण पेश किया जिसने पूरे दुमका का दिल जीत लिया।
दरअसल, सविता शर्मा की मौत के बाद उनके बेटों — विशाल और कुणाल शर्मा — और मामा बिपलव शर्मा ने उसी स्थान पर अपने खर्चे से बांस और कपड़े से घेराबंदी की है, जहाँ हादसा हुआ था। उन्होंने टूटे हिस्से को भरा और राहगीरों के लिए रास्ता सुरक्षित बनाया।
उनका कहना है — “हमारी मां तो अब लौट नहीं सकती, लेकिन अगर हमारी कोशिश से किसी और की मां बच जाए, तो यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
स्थानीय लोग भी इस कदम की सराहना कर रहे हैं और इसे प्रशासन के लिए एक “आईना” बता रहे हैं। क्योंकि कई दिनों बाद भी नगर परिषद की ओर से स्थायी मरम्मत का कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
शहर के कई नालों की हालत इसी तरह जर्जर है — कहीं स्लैब टूटे हैं, कहीं साइड वॉल नहीं है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है, या फिर सुरक्षा केवल कागज़ों तक सीमित रहेगी?
कैसे हुई थी दर्दनाक मौत
यह घटना 1 अक्टूबर की है। दुर्गा पूजा की नवमी तिथि पर तेज बारिश के बीच 55 वर्षीय सविता शर्मा घर लौट रही थीं। अचानक फिसलन भरी सड़क पर पैर फिसल गया और वे शहर के मेन ड्रेनेज सिस्टम की खुली नाली में जा गिरीं।
उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पति का साथ पहले ही छूट चुका था — अब बेटों के सिर से मां का साया भी उठ गया। पूरे इलाके में इस दर्दनाक हादसे ने गुस्सा और गहरा शोक दोनों पैदा कर दिया।
प्रशासन की बेरुखी पर सवाल
हादसे को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन न नगर परिषद ने कोई ठोस कदम उठाया, न ही जिला प्रशासन का कोई प्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा।
लोगों का कहना है कि अगर जिम्मेदार पहले ही कदम उठाते तो आज एक परिवार उजड़ने से बच जाता।
शहरवासी अब पूछ रहे हैं — क्या दुमका की सुरक्षा व्यवस्था किसी नई त्रासदी का इंतजार कर रही है?

