
“राँची–पुरुलिया पथ चौड़ीकरण में भारी लापरवाही कहीं नाली टूटी है तो कहीं दीवार में दरार , कहीं रोड से ऊपर नाली

Arjun Kumar…..✍️

नामकुम(राँची) । राँची–पुरुलिया पथ के चौड़ीकरण कार्य—जो दुर्गा सोरेन चौक से अनगड़ा चौक तक जारी है—विकास की एक अहम पहल मानी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे को चुनौती देती दिख रही है। सड़क के साथ बनाई जा रही नालियों की स्थिति शुरुआती चरण में ही चिंताजनक हो गई है। कहीं नालियां पूरी तरह टूट चुकी हैं, तो कई जगह उनकी दीवारों में दरारें साफ नजर आ रही हैं। सबसे गंभीर खामी यह है कि कुछ स्थानों पर नालियां सड़क से ऊंची बना दी गई हैं, जिससे बारिश का पानी उनमें जाने के बजाय सड़क पर ही जमा होने का खतरा बढ़ गया है। टाटीसिलवे स्थित ईईएफ मैदान के पास हालात और भी खराब हैं, जहां नाली की दीवारों में पड़ी दरारें निर्माण की गुणवत्ता पर सीधा सवाल खड़ा करती हैं और भविष्य में बड़े नुकसान का संकेत देती हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। तकनीकी निगरानी की जिम्मेदारी इंजीनियरों की होती है, जबकि तय मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य पूरा करना ठेकेदार का दायित्व है। काम के शुरुआती दौर में ही इस तरह की खामियां सामने आना या तो गंभीर लापरवाही दर्शाता है या फिर मिलीभगत की आशंका को बल देता है। सरकार की यह प्रोजेक्ट आम जनता के टैक्स के पैसों से संचालित हो रहा है, इसलिए लोगों को गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ निर्माण मिलना उनका अधिकार है। लेकिन मौजूदा स्थिति इस अधिकार पर सवाल खड़े कर रही है। अब जिम्मेदारी संबंधित विभाग—पथ निर्माण विभाग—और जिला प्रशासन की है कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और यदि गड़बड़ी पाई जाए तो संबंधित इंजीनियरों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। सबसे चिंताजनक पहलू यह भी है कि इतनी स्पष्ट खामियों के बावजूद आम लोग खामोश नजर आ रहे हैं। यह खामोशी कहीं न कहीं सिस्टम पर घटते भरोसे या कार्रवाई न होने के डर की ओर इशारा करती है। राँची–पुरुलिया पथ का चौड़ीकरण क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यदि निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह परियोजना आने वाले समय में बड़ी समस्या बन सकती है। अब समय है कि जवाबदेही तय हो, पारदर्शी जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए—ताकि विकास के नाम पर जनता का भरोसा टूटने से बचाया जा सके।

