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चांडिल : ग्राम प्रधान का मानदेय के लिए बलभद्र गोराई अंचल कार्यालय मे चक्कर लगा रहा है…

चांडिल : देश के वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुविधा देने की बात कही जाती है । पर जब एक सिनियर सिटीजन को एक पखवाड़े से सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाते देखा जाता है तो, समझने मे देर नही लगता है कि सरकारी दफ्तर “माया जाल” समा चुकी है।

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ऐसा ही एक तस्वीर सरायकेला – खरसवाँ जिला अधीन ईचागढ़ प्रखण्ड क्षेत्र के मैसाड़ा पंचायत की बुरुहातू ग्राम प्रधान बलभद्र गोराई के मामले में देखा गया । खबरों के अनुसार बलभद्र गोराई नाम के एक वयस्क वृद्धा अंचल कार्यालय से परेशान हो चुका है । बताया जाता है कि, वह ग्राम प्रधान है और लंबे समय से उसे मानदेय नहीं सरकार के द्वारा नहीं मिला है।

खबरों के अनुसार उन्हे ग्राम प्रधान के रूप में विधिवत चयन 2006 हुई थी । और प्रधान का परिचय पत्र भी अंचल कार्यालय से निर्गत किया गया। उन्होंने कहा कि जब तक ग्राम प्रधान का मानदेय नहीं था तब तक के लिए कोई दावा नहीं है । पर वर्ष 2019 को ग्राम प्रधान की मानदेय 2000 रुपया मिलने की सरकारी घोषणा की गई । तब से कोई मानदेय नहीं मिला है।

इस संबंध में  ईचागढ़ के अंचलाधिकारी दीपक प्रसाद का कहना‌है कि, बताया कि ग्राम प्रधान की चयन को लेकर कोई साक्ष्य न मिलने की कारण ही आज ग्राम प्रधान की मानदेय के लिए यह समस्या हो रहा है।

दोनों पक्षों के बातों से ऐसा लग रहा है कि, अगर आवेदक के कथा अनुसार उनका चयन पूर्व में हुई होगी तो, संबंधित दस्तावेज कार्यालय में कहीं खो गया होगा या तो फिर, तत्कालीन अंचलाधिकारी कागजातों को सही तरीके से दफ्तर में समायोजित कर के नहीं रखा होगा । इसका परिणाम यह परेशानी दोनो पक्षों को हो रहा है । ऐसी स्थिति में आवेदक के पास किसी तरह का साक्ष के लिए सरकारी कागजात उपलब्ध है तो मामला को आगे बढ़ने के लिए प्रकाश मिल सकता है ।

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