Advertisements
Spread the love

विशेष: पाट संक्रांति पर चड़़क पूजा आज :

तब अंग्रेजों ने बंद करा दी थी परंपरा…..

सरायकेला Sanjay । अंग्रेजी में हुक स्विंग फेस्टिवल तथा स्थानीय भाषा में उड़ा पर्व के नाम से प्रचलित साहसिक एवं रोमांचित करने वाली करतब भरी परंपरा का इतिहास क्षेत्र में वैदिक कालीन बताया जाता है। जिसे पाट संक्रांति के अवसर पर आंशिक या पूर्ण रूप से क्षेत्र के प्रायः सभी गांव में भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। शुक्रवार को होने वाली पाट संक्रांति के अवसर पर चड़क पूजा का आयोजन किया जाएगा। जिसमें सभी स्थानों पर चड़क पूजा पर आयोजित होने वाले उड़ा पर्व के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाएगा।

Advertisements

बताते चलें कि उड़ा पर्व के दौरान भक्तों और भोक्ताओं द्वारा आस्था के बल पर किए जाने वाले दर्दनाक और साहसिक करतबों को देखते हुए अंग्रेजों ने एक समय में इसके आयोजन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। बताया जाता है कि उड़ा पर्व के दौरान भोक्ता को पीठ में घुसे हुए लोहे की हुक के सहारे ऊंची लकड़ी के बल्ले से लटका कर गोल गोल घुमाया जाता था। जिसमें कई एक परिस्थितियों में भोक्ता की मौत तक हो जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने इसके आयोजन पर रोक लगा दी थी। बाद में ब्रिटिश सरकार के साथ हुए समझौते के बाद कई एक परिवर्तनों के साथ इस परंपरा को पुनः प्रारंभ किया गया था। जिसमें वर्तमान में पीठ में हुक घुसाने के साथ-साथ कमर में रस्सी बांधकर गोल गोल घुमाने की परंपरा जारी है।

इसके अलावा पीठ में घुसी लोहे की हुक के सहारे सवारी बैल गाड़ियों को खींचना, रंजणि फुड़ा के तहत लोहे के कांटा से भक्त अपने दोनों बाजुओं को छेद कर धागे का घर्षण करते हैं। मोड़ा पाट के तहत लकड़ी के ऊपर लोहे की कील कि शैय्या पर खाली बदन लिटा कर भोक्ता को शोभायात्रा के साथ मंदिर प्रांगण तक लाया जाता है। जिव्हा बाण के तहत भक्त लोहे की कील को अपने जीभ के आर पार करते हुए धागे का घर्षण करते हैं। इसी प्रकार मन्नतों के साथ निआँ पाट करते हुए भक्त आग के अंगारों पर चल कर भक्ति का प्रदर्शन करते हैं। पूरे मामले में चमड़े का बेल्ट या जूता चप्पल पहनना सख्त मनाही होता है।

 


सरायकेला के भूरकुली गांव में बाबा विश्वनाथ मंदिर के प्रांगण में प्रतिवर्ष चड़क पूजा के साथ चैत मेला का भव्य आयोजन होता है। जिसमें आसपास के ग्रामीण इलाकों सहित दूरदराज से भी भक्त और भोक्ता चड़क पूजा में शामिल होने भूरकुली गांव पहुंचते हैं। इस वर्ष भी भव्य परंपरागत आयोजन को लेकर स्थानीय समिति द्वारा तैयारी की जा रही है।

You missed

#दरभंगा #दरभंगा #चंपारण #भागलपुर #दहशत #आतंक #दंगा #नक्सल #लूट #संथाली #आदिवासी #हरिजन # पिछड़ी जाती News Uncategorized उत्पिड़न किसान कोडरमा कोयलांचल कोल्हान क्राइम खुटी गढवा गिरीडीह गुमला गोड्डा चतरा चाईबासा चोरी जमशेदपुर जरा हटके जामताड़ा झारखण्ड टेक्नोलॉजी दिल्ली दुमका दूर्घटना देवघर धनबाद पटना पलामू पश्चिम सिंहभूम पाकुड़ पूर्वी सिंहभूम प्रशासन - सुरक्षा बल बिज़नेस बिहार बिहार बोकारो भ्रष्टाचार/अराजकता राँची राजनीति राज्य राज्यसभा रामगढ़ लाइफस्टाइल लातेहार लोकसभा लोहरदग्गा विकास कार्य विधानसभा शहर शिक्षा व रोजगार शोकाकुल संथाल सरायकेला-खरसावाँ साहिबगंज सिमडेगा सुर्खियां स्वास्थ्य हजारीबाग

रांची : पंचायती राज का सपना धरातल में कहां तक सच हो पाया है ?