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महाअष्टमी पर दुर्गा पूजा सम्पन्न – ईचागढ़ राजवाड़ी एवं माझी बाड़ी पूजा का तीन सौ वर्षों का इतिहास

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चांडिल संवाददाता की रिपोर्ट

चांडिल । सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़, कुकड़ू एवं तमाम प्रखंड क्षेत्रों में सोमवार से महा सप्तमी के साथ मां दुर्गा की पूजा का शुभारंभ हुआ। मंगलवार को महाअष्टमी पूजा, संधिपूजा एवं पारंपरिक बलिदान के साथ पूजा-अर्चना सम्पन्न हुई। मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

ईचागढ़ राजवाड़ी दुर्गा पूजा का इतिहास तीन सौ वर्षों से भी अधिक पुराना है। राजा विक्रमादित्य आदित्य देव द्वारा स्थापित इस परंपरा को आज भी राज परिवार बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रहा है। खास बात यह है कि राजपरिवार आज भी दो अलग-अलग मूर्तियों की स्थापना कर पूजा करता है।

इसी तरह, ईचागढ़ के डुमरा गांव में जमींदार रसराज माझी द्वारा 251 वर्ष पूर्व स्थापित माझी बाड़ी दुर्गा पूजा भी भव्यता से जारी है। यहां हर वर्ष सप्तमी से दशमी तक मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है, और आज भी जमींदार वंशज इस परंपरा को निभा रहे हैं।

महाअष्टमी के अवसर पर पिलीद, सितु, चोगा, आदारडीह, लावा, चीपड़ी, टीकर, कुईडीह, जारगोडीह, रूगड़ी, तिरूलडीह, कुकड़ू सहित कई गांवों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। मंदिरों में व्रतियों ने लाइन लगाकर मां दुर्गा को पुष्पांजलि अर्पित की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

ईचागढ़ क्षेत्र में दुर्गा पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सैकड़ों वर्षों से सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का भी जीवंत उदाहरण बना हुआ है।

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