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पोटका : आदिवासी भूमिज समाज का द्वितीय राजभाषा दिवस के दिन कालिकापुर क्षेत्र मे पुनर्गठन 

अभिजीत सेन…✍️

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पोटका के जादूगोड़ा स्थित मां रंकणी कापड़गादीघाट धुमकुड़िया भवन परिसर में रविवार 5 अक्टूबर 2025 को आदिवासी भूमिज भाषा, का द्वितीय राजभाषा दिवस मनाया गया। इस दौरान सैकड़ो संख्या में भूमिज समाज के लोग उपस्थित हुए। कार्यक्रम के शुरुआत भूमिजों के द्वारा साल वृक्ष के नीचे दीप प्रज्वलित किया गया तथा पूजा अर्चना किया गया।

5 अक्टूबर 2018 को महामहिम झारखंड सरकार के राज्यपाल के द्वारा स्वीकृति प्रदान किया गया था। तब से लेकर आज तक इस दिवस को लगातार मनाते आ रहे हैं। इसे मनाने का उद्देश्य है कि आने वाला पीढ़ी दर पीढ़ी समाजिक परंपरा को जान पाएंगे। ताकि अपने भाषा में अपना इतिहास लिखेंगे। क्योंकि भाषा ही किसी समुदाय का पहचान है। जिससे अपनी कस्टम सिस्टम को जिंदा रख सकता है । अपनी मातृभाषा मां के दूध के समान होती है। इस दौरान भूमिज समाज के लोगों ने झारखंड सरकार से जे पी एस सी जैसे उच्च स्तरीय आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा में भूमिज भाषा को शामिल करने की जोरदार मांग उठाई। इस मौके पर जयपाल सिंह सरदार, उपमुखिया रामेश्वर सरदार, बसंती सरदार ने कहा कि बीते 5 अक्टूबर 2018 को राज्यपाल की ओर से भूमिज भाषा को द्वितीय राजभाषा का मंजूरी मिली है , इसके बावजूद भी उच्च स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा में भूमिज भाषा को वंचित रखा गया,जिसे भूमिज समाज असंतुष्ट है । बैठक में भूमिज बहुल गांव के स्कूलों में भी भूमिज भाषा की मांग उठाई गई।इसके पूर्व कालिकापुर तरफ के भूमिज पारम्परिक स्वशासन व्यवस्था मसलन डिगर ,,सरदार, नायक सरदार, पायक सरदार, घटआल , हातू सरदार( प्रधान) नाया, देवरी, पीर नायक, पांड़ीगिराई, डकुआ, डांड़ीया की स्वशासन विधि व्यवस्था, के संचालन के लिए समिति का पुनर्गठन, कार्य एवं दायित्व सौंपा गया। इस कार्यक्रम आदिवासी भूमिज समाज के बसंती सरदार, विभीषण सरदार, जय पाल सिंह सरदार, कालीकरण सरदार, रामेश्वर सरदार , ग्राम प्रधान मनोरंजन सिंह समेत सोहदा, कालिकापुर, हेसल, पोड़ातेतला, ग्वालकाटा, धीरोल, हेसल बिल, पोटका, चांदपुर, गीतिलता, माटकु पंचायत के भूमिज समाज के लोग उपस्थित रहे।

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