
üघाटशिला : विधायक सोमेश सोरेन ने सड़को में पानी जमावड़ा का मामला सदन के पटल में रखा
दीपक नाग… ✍️

कहा जाता है किसी भी गांव या शहर के सड़को को देख कर वहां के विकास का प्रथम दृष्टया में अंकल किया जाता है। घाटशिला शहरी क्षेत्र की सड़कें कुछ महीने पहले जीर्ण अवस्था मे था। इन सड़कों का कार्य वर्ष 2025 के अंतिम महीनों में आरंभ हुआ। देर रातों में निर्माण कार्य चला करता था। कैसा कार्य ठेकेदार के द्वारा किया गया इसकी जानकारी आम जनता को नहीं है। वैसे भी निर्माण कार्य संबंधित जो विवरण पट लगाया जाना चाहिए वह भी पुरे सड़क के आस-पास कहीं मौजूद नहीं है। बताया जाता है कि, इस विवरण पट के लिए निविदा में अलग से चार-पांच हजार रुपये सरकारी खजाने से ठेकेदार को दिया जाता है। खैर बारिश का मौसम आने ही वाला है, निर्माण कार्य के गुणवत्ता का खुलासा है ही जाएगा, बारिश की पहली बुंदे झेल पाता है कि नहीं ? यह अहम सवाल है।

सवाल यह है कि, आखिर यह सड़कें आगे भी चुस्त-दुरुस्त कैसे बना रहें ? यह अहम सवाल है! इस दिशा में ११ मार्च’ २०२६ को घाटशिला विधानसभा के नवनिर्वाचित युवा विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने विधान सभा सत्र सदन मे अध्यक्ष के सामने रखा । उन्होंने सदन के अध्यक्ष का ध्यान आकृष्ट करवाते हुए कहा कि, वर्षा के ऋतु में घाटशिला के मुख्य सड़कों में जल जमा हो जाती है। जिस कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। दैनंदिन कार्यों में आम लोगों को परेशानिओं का सामना करना पड़ता है। सड़कों में जल ठहराव न हो इसके लिए उचित व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।
बता दूं कि, सड़कों में जल की जमावड़ा न है इस लिए पहले से ही नाले-नालियों का निर्माण कार्य अनेकों बार किया गया । पर परिणाम “ठाक के तीन पात” के समान। सरकारी खजानों को ख़र्च कर जिन उद्देश्यों से काम किया गया परिणाम हमेशा शुन्य रहा। आज जरूरत है, जानने की कि, क्या वजह है कि विभागीय अभियंताओं का टेक्नोलाजी हमेशा फेल क्यों होता रहा।
बहरहाल, घाटशिला विधानसभा के नवनिर्वाचित युवा विधायक ने क्षेत्र के एक अहम मुद्दे पर सदन में सवाल उठाया है। जाहिर है, नये पीढ़ी के युवा विधायक हैं, नये सोच और विचार के साथ बारिकी को समझने की कोशिश जरूर करेंगे और वर्षों से विभागीय विफलताओं को समाप्त कर निदान अवश्य निकालेंगे। जरुरत होगी पुरे मामले पर पैनी निगाह तब तक बनाए रखने की, जब तक बारिश का पानी सड़कों में ठहरना न बंद हो जाए ।
