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60 साल बाद भी मुआवजा, पुनर्वास और स्वामित्व अधूरा; रैयतों ने जमीन वापसी और नौकरी की उठाई मांग

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रिपोर्टर : जगबन्धु महतो 

बोकारो । बोकारो स्टील प्लांट के लिए 1960 के दशक में करीब 34,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा आज भी खाली पड़ा है। विस्थापितों का आरोप है कि न तो पूरा मुआवजा मिला, न पुनर्वास हुआ और न ही जमीन का स्वामित्व लौटाया गया।
भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार जिन जमीनों पर कब्जा या मुआवजा नहीं हुआ, वहां अधिग्रहण स्वतः समाप्त माना जाता है। इसके बावजूद हजारों परिवार दशकों से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि 64 मौजों की जमीन अधिग्रहित हुई थी, जहां आज भी लाखों लोग बिना बुनियादी सुविधाओं के रह रहे हैं। कई गांव सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, जिससे लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
विस्थापितों ने आरोप लगाया है कि एक ओर उनकी जमीन पर अवैध रूप से मॉल और व्यावसायिक निर्माण हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें अधिकारों से वंचित रखा गया है।
प्रभावित लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि डेढ़ महीने के भीतर नौकरी और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े आंदोलन के तहत खाली जमीन पर कब्जा कर खेती शुरू करेंगे।

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