
साहित्य सृजन के प्रति 90 के बाद भी दिवानगी
अंग्रेजी के प्रो0 केशव प्रसाद ने टीएस इलियट का अनुवाद किया

Ajun Kumar Pramanik…..✍️
रांची। भारतीय समाज में 60 साल के बाद व्यक्ति रिटायर्ड हो जाता है। लेकिन अंग्रेजी के प्रोफेसर केशव प्रसाद 93 वर्ष में भी साहित्य और सृजन के प्रति दिवानगी रखते है। रांची विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर होने के बाद भी उनकी अभिरूचि हिंदी साहित्य रही है। उन्होंने दो कविता संग्रह “क्योंकि आशंका सार्थक है” तथा, “पिरामिड और परछाई” लिखी है। उनका सबसे बड़ा काम टी0एस0 इलियट के चचिर्त काव्य संग्रह द वेस्ट लैंड एवं अन्य कविताओं का हिंदी में रूपांतरण किया है। इसके अलावा उन्होंने अंग्रेजी में एक किताब ग्राहम ग्रीन, दी हियूमन प्रीडिकामेंट लिखी है। राजधानी की प्रख्यात हिंदी लेखिका डाॅ ऋता शुक्ल ने उनके समग्र साहित्य को केशव प्रसाद एक संचयन में संकलित किया है।यह किताब अनुज्ञा प्रकाशन संस्थान से प्रकाशित हुआ है। डा केशव प्रसाद वयोवृद्ध होने के बाद भी लेखन में रुचि रखते हैं।
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