
Ghatsila : सक्रिय संवेदना ने स्वक्षता को लेकय जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया
रिपोर्ट : दीपक नाग
सक्रिय संवेदना के संयोजक विजय पाण्डेय ने जानकारी देते हुए कहा कि, सक्रिय संवेदना ने जन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की ओर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने और इनके अधिकार क्षेत्र में होने वाली जन-जीवन विरोधी घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया है।
पूरे अनुमंडल में, खुले में बिकने वाली मछलियाँ और मांस खाद्य सुरक्षा नियमों की खिल्ली उड़ाते हैं। कोरोना की जानलेवा बीमारी से आतंकित होकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2018 लागू किया गया था , जिसे स्थानीय स्तर पर लागू करने की प्रशासनिक पहल नदारद रही। लटकते हुए मांस और मछली के नज़ारे एक ओर बीमारियों को न्यौता देते हैं और दूसरी ओर प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण भी। जिन स्थानों पर इन्हें बेचा जाता है वहाॅ स्वच्छता के मानक कभी जमीन पर उतर ही नही पाये। गंदगी और दुर्गंध ऐसी समस्याऍ हैं जिनके निवारण की कोई चेष्टा प्रशासनिक पहल की सूची में स्थान नही पा सकी है। त्यौहारों के मौसम में सक्रिय संवेदना ने इस ओर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया है। घाटशिला की जनता किसी सक्षम पदाधिकारी द्वारा औचक निरीक्षण करने अथवा साफ-सफाई बहाल करने के लिए किसी कदम की याद नही कर पाती। जाहिर है कि खरीदने और बेचने वाले सुरक्षा मानकों से अनभिज्ञ हैं। मांस मछली के दुकानों के आसपास आवारा कुत्तों का आतंक एक अन्य समस्या है। सक्रिय संवेदना को विश्वास है कि घाटशिला में सुनियोजित दुकानों का निर्माण होगा जहाॅ स्वच्छता के मानक निर्धारित रहेंगे। उस बाज़ार में धुलाई- सफाई की व्यवस्था होगी जहाॅ उपभोक्ता निश्चिंत होकर मांस मछली खरीद पायेगा। आज पूरी तरह हाल भगवान भरोसे है।
