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घाटशिला : घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में मतदाता होने लगे हैं कन्फ्यूज !

दीपक नाग … ✍️

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विगत विधानसभा के चुनावों में भाजपा और झामुमो के बीच जबरदस्त तरीके से टक्कर हमेशा होता रहा है। पर इस बार के उपचुनाव का नजारा कुछ और ही है! पर अभी कुछ कहना मुश्किल है कि, टाइटेनिक किस का बचेगा और किस का पार लगेगा? यह एक यक्ष प्रश्न है।

चुनावी प्रचार और समाचारों के माध्यम से इतना अधिक आरोप – प्रत्यारोप लगा है कि, मतदाता कन्फ्यूज होने लगा है। हालत ऐसा होने लगा है कि, यह तय कर पाना मतदाताओं के लिए मुश्किल होगा कि कौन सही है और कौन गलत है। जानकार सूत्रों के अनुसार विगत दिनों, घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के एक कमेटी के इक सदर ने स्पष्ट कहा, झामुमो को लगातार मुस्लिम समुदाय समर्थन दिया पर जीत हासिल करने के बाद झामुमो ने एकबार झांकने तक नहीं आएं। मुस्लिम मतदाता हमेशा वोट बैंक के नाम पर स्तेमाल होता रहा। उन्होंने ने कहा, मुस्लिम समुदाय के पास विकल्प का रास्ता भी खुली हुई है। यह बातें, सोशल मीडिया में वायरल भी हुआ है।जाहिर है, भाजपा का वोट बैंक मुस्लिम वोट नहीं है और झामुमो से नाखुश नजर आने लगी है। ऐसे में उनके लिए तीसरे विकल्प के रुप में जयराम कुमार महातो के राजनीतिक दल जेएलकेएम तो नहीं है। क्योंकि, जेएलकेएम का अपने कुछ राजनीतिक एजेंडा है, जिसे लेकर कुड़माली समाज वर्षों से निरंतर सरकारों से भीड़ रहें हैं। दुसरी बात जेएलकेएम झारखंड मे व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ और विकास की बातें करतें हैं। हिन्दू, मुस्लिम, सीख, ईसाई वगैरह-वगैरह समिकरण से अब तक खुद को दूर रखा है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय जो वर्षों से जात-पात के नाम पर राजनितिज्ञ के लिए वोट बैंक बना हुआ है, कहीं ऐसे राजनीतिक दलों से वितृष्णा तो नहीं है गया है। अगर ऐसा है तो, जेएलकेएम संभवतः इस्लामी मतदाताओं के लिए तीसरा विकल्प खुला हो सकता है।

गौर करने का योग्य बात है कि, गांव या मोहल्लों में भाजपा और झामुमो दोनों का ही चुनाव प्रचार टीम आगे – पीछे जातें हैं। वहां मौजूद जनमत दोनों को ही विश्वास दिलाते हैं कि, “हम तो बस आप के ही है।” किसी भी राजनीतिक दल के प्रचारक को निराश नहीं करते हैं। प्रचार टीम खुश हैं कर चले जाते हैं कि, तीर निशाने पर लगा गया। पर वोट तो चुनावी कुरुक्षेत्र में मौजूद तेरह प्रत्याशीयों में से किसी एक को ही मिल सकता है। 

इधर जेएलकेएम के केन्द्रीय अध्यक्ष जयराम कुमार महातो ने घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के लिए पुरा खाका बनाकर अपने दल के लोगों को शेयर किया है। चुनावी तैयारी के लिए श्रेणीबद्ध तरीके से पार्टी के लोगों को जिम्मेदारी के सौंप चूके हैं। संभवतः अब तक मैदान में उतर भी चुके होंगे।

बहरहाल, कुल मिलाकर इतना तो समझ में आने ला है कि, इस बार का चुनाव संभवतः त्रिकोणीय न हो जाए। अगर ऐसा होता है तो, निसंदेह भाजपा और झामुमो के लिए “लोहे के चने चबाना के समान न हो जाए! विधानसभा क्षेत्रों में अंदर और बाहर रहने वाले प्रत्याशीयों का चर्चा दबे शब्दों में आग की तरह तेजी से फैलते जा रही है। खैर, 14 नवंबर के दिन स्पष्ट हो जाएगा कि, चुनाव रुपी समुद्र में किसके राजनीतिक टाइटेनिक परचम लहराया और किन लोगों का राजनीतिक टाइटेनिक ब्लेक होल में शमा गया !

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