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चाण्ड़िल ।  प्रखंड के शहरबेड़ा में इस पर्व को बाहा बोंगा भी कहा जाता है, यह पर्व प्रकृति की उपासना और आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है इस पर्व में समृद्धि समरसता और समृद्धि जीवन की कामना की जाती है।
बाहा पर्व में साल और महुआ के फूलों से मारांग बुरु, जाहेर आयो, मोड़ें क और बुरू बोंगा की पूजा की जाती है पारंपरिक वस्त्र पहने जाते हैं मांदर ढोल नगाड़ा बजाया जाता है, आदिवासी महिला पुरुष नृत्य करते हैं नायके बाबा (पूजारी) को सुबह सम्मान पूर्वक जाहेर स्थान में लाया जाता है, नए वस्त्र धारण किए जाते हैं। बाहा पर्व संबलता, सामाजिक एकता और संगठन की भावना को प्रकट करता है। इसलिए हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बारहा दिसम (चांडिल, नीमडीह, बड़ाम, पटमदा आदि 58 गांव) द्वारा बारहा दिसम बाहा बोंगा त्योहार मना । मांझी बाबा, नायके , भरदो, गडेत, पारानिक के साथ साथ समाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, छात्रों, राजनेता, आदि सम्मिलित हैं । मांझी पारगाना और अतिथियों को गमछा और ओलचिकी किताब प्रादान कर सम्मानित किया गया।चांडिल : कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों – बाबु राम सोरेन, मांझी पारगाना माहाल बारहा दिसम के अध्यक्ष पुटूलाल हांसदा, पारगाना बाबा सोमनाथ हेम्बर

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