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किसानों के लिए वरदान बना मडुआ

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उषा मार्टिन की पहल — ड्रिप इरिगेशन से 66 एकड़ बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया
नकदी फसल एवं मोटे अनाज से आत्मनिर्भर बन रहे किसान

Arjun Kumar Pramanik……✍️

नामकुम(रांची)। टाटीसिलवे के इर्द-गिर्द के गांवों के किसानों के लिए मडुआ की फसल वरदान बन गई है। किसानों में मोटे अनाज का चलन बढ़ा है। अच्छा मुनाफा कमाने की चाह में किसानों के लिए मडुआ की खेती एक अच्छा विकल्प बन गया है। स्थानीय बाजार में इसकी फसल आसानी से बिक जाती है। इस साल 70 से अधिक किसानों ने 40 एकड़ में मडुआ की खेती की है। पिछले साल 49 किसानों को केवल मडुआ की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया था, जिन्होंने दस एकड़ में मडुआ लगाया था।

उषा मार्टिन फाउंडेशन ने ड्रिप इरिगेशन के माध्यम से इन भूमि को सिंचित बनाया है। इससे बंजर एवं गैर-उपजाऊ जमीन को मोटे अनाज एवं नकदी फसल की खेती के लिए तैयार किया गया है। इस पहल से कारखाने के इर्द-गिर्द के गांवों की 66 एकड़ जमीन खेती योग्य बन गई है।

फाउंडेशन के हेड डॉ. मयंक मुरारी ने बताया कि गांवों में किसानों के सहयोग से ऊर्जा एवं जल संरक्षण तथा भूमि की मृदा को बचाने के अभियान के तहत यह कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले के जमाने में लोग मडुआ की खेती करते थे और बिना रसायन एवं उर्वरक के उपयोग के ही अपनी सेहत को बेहतर बनाए रखते थे। आज भी ग्रामीणों को परंपरागत खेती एवं नकदी फसलों के माध्यम से सेहत के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

किसान गांव स्तर पर अपनी खेती में आत्मनिर्भर हों, इसके लिए कंपनी के माध्यम से मासू, अनगड़ा और सिलवई में पॉलीनेट स्थापित किया गया है, जिससे बीज एवं पौधों को कीटाणुओं से बचाया जा सके।

उषा मार्टिन फाउंडेशन की ओर से पिछले एक साल से अनगड़ा एवं नामकोम के चिन्हित प्रगतिशील किसानों के समूह को तैयार कर खेती से आत्मनिर्भरता एवं आय सृजन के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके पहले चरण में 80 किसानों की जमीन की मृदा जांच की गई। इसके बाद 33 किसानों की जमीन को ड्रिप इरिगेशन के लिए चयनित किया गया। सरकारी सहयोग से इन किसानों के खेतों में ड्रिप इरिगेशन की पूरी सुविधा मुहैया कराई गई, जिसके अनुदान की राशि कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई गई। इसके बाद किसानों को सब्जी, नकदी फसल एवं मोटे अनाज की खेती के लिए चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण रामकृष्ण मिशन एवं अन्य संस्थाओं के सहयोग से गांव स्तर पर संपन्न हुआ। आठ किसानों को स्ट्रॉबेरी, तरबूज, खरबूज, सूरजमुखी और हल्दी की खेती कराई जा रही है।

फसल के लिए नहीं करना पड़ता इंतजार : देवकी देवी

मासू की किसान देवकी देवी ने बताया कि मडुआ एक ऐसी फसल है, जिससे सिर्फ चार महीने के अंदर लाखों रुपए कमा सकते हैं। इतना ही नहीं, इस फसल के लिए लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ता और कम मेहनत में ही इसकी खेती संभव है।

अच्छा कीमत मिलता है फसल का : महावीर महतो

किसान महावीर महतो ने कहा कि बाजार में मडुआ की कीमत 120 से 140 रुपए प्रति किलो तक होती है। अगर उपज की बात करें, तो एक एकड़ में तीन क्विंटल तक मडुआ की पैदावार हो सकती है। मडुआ की पूरी फसल 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है।

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