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रांची : घाटशिला विधानसभा के उप-चुनाव को लेकर स्थानीय भाजपाई का मिजाज क्या कह रहा है ?

दीपक नाग… ✍️

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अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित घाटशिला विधानसभ चुनाव क्षेत्र झारखंड राज्य मे हमेशा एक आकर्षक का केंद्र रहा है। झारखंड के स्कूल शिक्षा मंत्री सह यहां के विधायक रामदास सोरेन के निधन के बाद घाटशिला विधानसभा ऋक्त हो गया । जाहिर है, संवैधानिक नियमों के तहत घटना के छः महीने के भीतर उप-चुनाव होना भी लाजमी है।

बता दें कि, राजनीतिक गठबंधन के कारण पिछले कई चुनावों में इस चुनावी मैदान मे झामुमो और भाजपा के बीच सीधी टक्कर होता रहा है । पार्टी के हाई कमान तय करता है कि, टिकट किसे दें। जबकि, पार्टी में से कई लोग अपने-अपने किस्मत आजमाने की कोशिश करते रहें हैं । 

घाटशिला विधानसभा चुनावी क्षेत्र ऋक्त होने से महत्वकांक्षी पार्टी के सदस्यों में भी बैचैनी बढ़ना स्वाभाविक है । गौर करने वाली बात है कि, उस राजनीतिक दल के स्थानीय कार्यकर्ताओं का झुकाव किस पर है । यानी अपने पार्टी टिकट से चुनावी कुरुक्षेत्र में किसे देखने और जितना चाहता है । ऐसा ही कुछ दृश्य आज मुसाबनी के अनेक भाजपाइयों में नजर आया । भाजपा नेता रमेश हांसदा आज जमशेदपुर से मुसाबनी में देखा गया । मुसाबनी भाजपाइयों का एक सक्रिय जत्था मुसाबनी प्रखंड भाजपा महामंत्री बिरमान लामा के नेतृत्व मे रमेश हांसदा का गर्म जोशी के साथ स्वागत किया । यहां कुछ झारखंड अलग राज्य आन्दोलन के आन्दोलनकारी भी पहले से प्रतिक्षा कर रहे थें।

 इतना तो समझ में आ ही रहा था कि, स्थानीय भाजपा के युवा रमेश हांसदा घाटशिला विधानसभा उप-चुनाव कुरुक्षेत्र में भाजपा के टिकट से देखना चाहते हैं । क्यों कि, पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी को लेकर भाजपाईयों में संतोष जनक स्थिति नहीं थी । परिणाम स्वरूप भाजपा को घाटशिला विधानसभा सीट से निराशा हासिल हुई ।

बता दूं कि, रमेश हांसदा झारखंड मुक्ति मोर्चा मे एक जोरदार चेहरा रहा है। बाद मे भाजपा का दामन थामा । जिस कारण झामुमो के अच्छे – बुरे सभी चालों से अच्छी तरह वाकिफ होना लाजिमी लगता है । अपने ही बदौलत राजनीतिक क्षेत्र में पहचान बनाई है। ऐसे में, अगर एक पत्रकार के दृष्टि से सोचे तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि, घाटशिला विधानसभा उप-चुनाव के लिए तैयारी करना रमेश हांसदा शुरू कर दी है। रमेश हांसदा भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क करना आरंभ कर दिया है ।

बहरहाल, उपस्थित भाजपाइयों के चेहरों में चमक नजर आ रही थी। भाजपा के हाई कमान इस बार के चुनाव मे बगैर धरातल में पैर रखे टिकट आसानी से किसी को नहीं देगी ऐसा लगता नहीं है। क्यों कि, पार्टी प्रत्याशी को अगर पैरा ड्राप करवा कर उतारा जाए तो चुनाव के मैदान में मिट्टी छोड़कर बैरन लौटना पड़ता है ।

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