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शत प्रतिशत दिव्यांगजनो का यूडीआईडी सर्टिफिकेट जनरेज

करना शिविर का मुख्य उदेश्य- उपायुक्त

सरायकेला। उपायुक्त अरवा राजकमल ने कार्यालय कक्ष में सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार, सरायकेला अनुमंडल पदाधिकारी राम कृष्ण कुमार, समाज कल्याण पदाधिकारी शिप्रा सिन्हा, सामाजिक सुरक्षा पदाधिकारी निवेदिता राय के साथ जिले में दिव्यांगजनों के लिए युडीआईडी सर्टिफिकेट जेनरेशन को लेकर चलाए जा रहे विशेष शिविर के सफल क्रियान्वयन के संबंध में बैठक किया।

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इस दौरान उपायुक्त ने बताया कि जिले में सभी प्रखंडों में विशेष शिविर के माध्यम से दिव्यांगजनों का यूडीआईडी सर्टिफिकेट जेनरेज किया जा रहा है। उपायुक्त ने कहा कि शिविर का मुख्य उदेश्य शत प्रतिशत दिव्यांगजनों का युड़ीआईडी सर्टिफिकेट जनरेट करना है। इस दौरान उपायुक्त ने कहा कि प्रखंड स्तर पर इस विशेष शिविर का व्यपाक प्रचार प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग उपस्थित हो सकें। उपायुक्त ने जिले के सभी प्रखंडो में कार्यरत आंगनवाड़ी सेविका, सहायिका, सहिया एवं जेएसएलपीएस की दीदीयों से अपील करते हुए कहा कि शिविर का व्यापक प्रचार प्रसार करते हुए अधिक से अधिक दिव्यांगजनों खास कर ग्रामीण क्षेत्रो में निवास करने वाले दिव्यांगजनों को इस शिविर में उपस्थित करा युड़ीआईडी सर्टिफिकेट जनरेट करने में मदद करें।

ताकि बार बार दिव्यांग का प्रमाण पत्र निर्गत कराने की आवश्यकता ना पडे। उपायुक्त ने कहा कि प्रायः ऐसा देखा जाता है की दिव्यांग प्रमाण पत्र ना होने के कारण सरकार के योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। जिसे दूर करने तथा शत प्रतिशत दिव्यांगजनों का डिजिटल प्रमाण पत्र निर्गत करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम की जा रही है। इस दौरान उपायुक्त ने कहा कि आवश्यकता को देखते हुए पुन: 17 से 31 मार्च तक विभिन्न पंचायतों में शिविर का आयोजन किया जाएगा ताकि छुटे हुए दिव्यांगजनों का डिजिटल प्रमाण पत्र निर्गत किया जा सके। इस दौरान उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके परिवार या आस पास में कोई दिव्यांगजन रहते हैं तो उन्हें इस विशेष शिविर में लाकर उनका युड़ीआईडी सर्टिफिकेट जनरेट करने में मदद करें। उपायुक्त ने कहा कि ऐसे दिव्यांगजन जिनका पूर्व में दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है।

वह भी इस शिविर में उपस्थित होकर अपना डिजिटल युड़ीआईडी सर्टिफिकेट जनरेट करा ले। ताकि बार बार सर्टिफिकेट रिनुअल ना करना पडे। उपायुक्त ने कहा कि एक बार डिजिटल युड़ीआईडी सर्टिफिकेट जनरेट होने से बार बार दिव्यांग का प्रमाण पत्र बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह प्रमाण पत्र पूरे भारत में मान्य है। इस सर्टिफिकेट के माध्यम से दिव्यांगों हेतु चलाई जा रही योजनाओं के लाभ लिए जा सकते हैं।