
मयूराक्षी नदी से बेखौफ बालू माफिया का अवैध उत्खनन, प्रशासन पर उठे सवाल

दुमका ब्यूरो : मौसम गुप्ता
दुमका । उपराजधानी दुमका में इन दिनों मयूराक्षी नदी के विभिन्न घाटों से बालू माफिया खुलेआम अवैध उत्खनन कर रहे हैं। बेखौफ माफिया रात-दिन बालू की कालाबाजारी में जुटे हुए हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सैकड़ों बालू लदे ट्रैक्टर स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे से गुजर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार मयूराक्षी नदी से बालू का उठाव कर पुराना दुमका, हरणाकुण्डी क्षेत्र और हिजला मुक-बधिर विद्यालय मार्ग से प्रतिदिन करीब एक हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। न तो बालू माफियाओं को जिला प्रशासन का डर है और न ही कानून का।
ग्रामीणों का कहना है कि रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक बालू लदे ट्रैक्टर तेज रफ्तार से चलते हैं। शोर इतना अधिक होता है कि लोग सो नहीं पाते, और सुबह होते-होते धूल से वातावरण प्रदूषित हो जाता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी कार्यालय खुलते ही बालू ढुलाई बंद कर दी जाती है, ताकि प्रशासन की नजर न पड़े।
बताया जा रहा है कि अवैध रूप से उठाया गया बालू अन्य राज्यों, मुख्य बाजारों और आसपास के गांवों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि माफिया और प्रशासन की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर यह कारोबार संभव नहीं है।
हालांकि इस मामले पर दुमका के अंचल अधिकारी अमर कुमार ने कहा कि क्षेत्र में अवैध खनन या भंडारण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ आने वाले दिनों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन के ये दावे जमीन पर कितने उतरते हैं, या मयूराक्षी नदी यूं ही बालू माफियाओं की कमाई का जरिया बनी रहेगी।

