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उषा मार्टिन का उद्यमिता विकास की पहल

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महिलाओं के सशक्तिकरण से आत्मनिर्भरता बनती 60 महिलाएं
सोहराई, जूट, पेपरबैग एवं बांस उत्पाद से रोजगार
रांची। टाटीसिलवे की महिलओं का मेहनत, समर्पण और हुनर ने यह साबित कर दिया कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं। आज उषा मार्टिन फाॅउंडेशन के प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़कर 60 से अधिक महिलाएं न केवल अपने हुनर को बढ़ा रही है, बल्कि वे उद्यमिता विकास की ओर भी अग्रसर है। युवा जागृति संघ के सहयोग से इन महिलाओें के लिए सोहराई पेंटिंग, जूट की सामग्री निर्माण, बांस के उत्पाद एवं कागज का ठोंगा बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। 17 महिलाएं जूट बैग, 10 पेपर बैग, 15 बांस के उत्पाद और 15 सोहराई पेंटिंग सीख चुकी है। अब इनको उद्यमिता का हुनर सीखाया जा रहा है।
उषा मार्टिन फाॅउंडेशन द्वारा प्रशिक्षित महिलाओं ने अपने हुनर और मेहनत से जूट बैग्स एवं अन्य उत्पाद तैयार किए हैं, जिनमें पारंपरिक सोहराय पेंटिंग और विभिन्न स्व-निर्मित डिजाइन उकेरे गए हैं। फाॅउंडेशन के हेड डाॅ मयंक मुरारी ने बताया कि ये बैग न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति की पहचान भी दर्शाते हैं। ये महिलाएँ अपने हाथों से बने जूट उत्पादों के माध्यम से बाजार तक पहुँच बना रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं के लिए तीन जगहों टाटीसिलवे, हरातु और लुपुंग  में एवं अलग-अलग समय पर बैच बनाकर यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षित महिलाओं ने जूट फाइल बैग के अपने पहले ऑर्डर को सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह ऑर्डर मारुति मंगल परिवार को डिलीवर किया गया। युवा जागृति संघ के प्रमुख सुनील कुमार ने बताया कि जूट से 13 तरह का आइटम बनाया गया है। इनमें बैग, पर्श, थैला, फाइल, वाॅल हेंगिंग, पेसिंग पाउच, मोबाइल बैग आदि शामिल है। इन महिलाओं को मार्केट की बारीकियांे को समझाने के लिए शहरों के दुकानों का भ्रमण कराया जा रहा है। इन सभी का हुनरकार्ड भी बनवाया गया है। इस कार्यक्रम में युवा जागृति संघ अर्चना, विकास, अनुपम तथा फाॅउंडेशन से वरुण कुमार एवं संगीता कुमार समन्वय कर रहे हैं।

महिला समूहों ने 50 हजार की सामग्री बेची

प्रशिक्षित महिला समूहों ने टेªनिंग के बाद 50 हजार से अधिक की सामग्री बेच चुकी है। सोहराई पेंटिंग अभी तक 20 हजार, ठोंगा 15 हजार, जूट बैग 13 हजार और बांस की सामग्री पांच हजार का बेचा जा चुका है। यह जानकारी फाॅउंडेशन के लाइवलीहुड कोआॅडिनेटर संगीत कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि अगले चरण में टेलरिंग, मशरूम और प्लमबरिंग का प्रशिक्षण दिया जायेगा।

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