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5 साल की बच्ची के गले में फंसा रू 1 का सिक्का, डेढ़ घंटे की

मशक्कत के बाद चिकित्सक ने सकुशल सुरक्षित तरीके से निकाला

गले में फंसा सिक्का…..

सरायकेला। धरती पर भगवान के बाद जीवन बचाने वाले डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा गया है। आज के समय में कहीं-कहीं उक्त उक्ति विपरीत साबित हो रही है। तो कहीं-कहीं ऐसे डॉक्टर भगवान तुल्य पूजे भी जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही वाकया बुधवार को सरायकेला के अंजनी नगर स्थित मधुसूदन मेमोरियल पॉलीक्लिनिक में देखा गया। जहां अपनी 5 साल की बच्ची के जीवन की आस छोड़ चुके माता पिता ने बारंबार मधुसूदन मेमोरियल पॉलीक्लिनिक के संचालक सह चिकित्सक डॉ प्रदीप कुमार का आभार जताते रहे।

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क्या है मामला:-

कुचाई के गुटुहातु में किराने का एक छोटा सा दुकान चलाने वाले रवि बेसरा एवं उनकी पत्नी करमी बेसरा की 5 साल की बेटी कविता बेसरा ने खेल खेल में दुकान के गल्ले से रू1 का सिक्का निकालकर मुंह में डाल ली। जो उसके गले में जाकर फंस गया। उस समय रवि बेसरा आवश्यक काम से कोलकाता गए हुए थे। स्थानीय बारूहातु पंचायत की मुखिया रेखा मुनि उरांव के पति दशरथ उरांव के सहयोग से स्थानीय चिकित्सक डॉ शिवचरण हांसदा की सलाह पर बच्ची कविता को सुरक्षित तरीके से रखा गया। मंगलवार की सुबह रवि बेसरा के घर पहुंचने के बाद स्थानीय चिकित्सक डॉ शिवचरण हांसदा की सलाह पर बच्ची कविता को सरायकेला के अंजनी नगर स्थित मधुसूदन मेमोरियल पॉलीक्लिनिक लाया गया। जहां अंडर ऑब्जर्वेशन रखते हुए बुधवार की सुबह तकरीबन डेढ़ घंटा की मशक्कत के बाद इलेक्ट्रोलाइट तकनीक से बिना चीर फाड़ के सुरक्षित तरीके से बच्ची कविता के गले से रू 1 का सिक्का बाहर निकाला गया।

जिसके तकरीबन 3 घंटे बाद बेहोशी की नींद से जागने पर 5 साल की कविता बेसरा ने पहले की ही भांति हंसते खेलते हुए मां से मिलकर भूख लगने की बात कही। मौके पर मौजूद पिता रवि बेसरा, माता करमी बेसरा, मुखिया पति दशरथ उरांव एवं गांव से पहुंचे अन्य लोगों ने भी खुशी जाहिर करते हुए चिकित्सक आभार जताया।

मौके पर चिकित्सक डॉ प्रदीप कुमार ने कहा कि मधुसूदन मेमोरियल पॉलीक्लिनिक में इस प्रकार का यह पहला मामला था। जिसका सफल एवं सुरक्षित ऑपरेशन किया गया है।