
विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष उषा मार्टिन का पृथ्वी की मृदा संरक्षण की पहल

ड्रीप इरिगेशन से 90 एकड़ बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया
नकदी फसल एवं मोटे अनाज से आत्मनिर्भरता बनें किसान
पाॅलीहाउस से 15 गांवों में वैज्ञानिक तरीके से खेती को बढ़ावा
राँची । उषा मार्टिन फाॅउंडेशन ने पृथ्वी ककी मृदा संरक्षण के लिए कई पहल किया है। ड्रीप इरिगेशन के माध्यम से भूमि को सिंचित बनाया है। इससे बंजर एवं गैर उपजाऊ जमीन को मोटा अनाज एवं नकदी फसल की खेती के लिए तैयार किया गया है। इससे टाटीसिलवे स्थित कारखाना के इर्द गिर्द के गांवों के 90 एकड़ जमीन को अभी तक खेतीबारी के लिए तैयार किया गया है। इस पूरे अभियान को पिछले एक साल में पूरा किया गया है। यह अभियान भारत सरकार के लाइफ मिशन के तहत ऊर्जा एवं जल संरक्षण तथा भूमि की मृदा को बचान के अभियान के तहत चलाया गया है है।
उषा मार्टिन फाॅउंडेशन की ओर से पिछले एक साल से अनगड़ा एवं नामकोम के चिन्हित प्रगतिशील किसानों के समूह को तैयार कर खेती से आत्मनिर्भरता एवं आय सृजन के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए पहले चरण में 200 से अधिक किसानों के जमीन की मृदा जांच की गयी। इसके बाद 30 किसानों के जमीन को ड्रीप इरिगेशन के लिए चयनित किया गया। अभी तक 88 किसानों को ड्रीप इरिगेशन से जोड़ा जा चुका है। सरकारी सहयोग से इन किसानों के खेतों में ड्रीप इरिगेशन की पूरी सुविधा मुहैया करायी गयी, जिसके अनुदान की राशि कंपनी के द्वारा उपलब्ध करायी गयी। इसके बाद किसानों को शब्जी, नकदी फसल एवं मोटे अनाज की खेती के लिए चरणबद्ध तरीकें से प्रशिक्षण मुहैया कराया गया। यह प्रशिक्षण रामकृष्ण मिशन एवं अन्य संस्थाओं के सहयोग से गांव स्तर पर संपन्न हुआ। इस साल 16 किसानों को स्ट्रोबेरी, 33 से अधिक किसानों को तरबूज, खरबूज, सूरजमुखी एवं अन्य नकदी फसल के लिए बीज मुहैया कराया गया। इसके अलावा 16 गांवों के पांच सौ से अधिक किसानों को गरमा एवं शब्जी के बीज मुहैया कराया गया।
उषा मार्टिन फाॅउंडेशन के माध्यम से हरेक चरण पर किसानों से समन्वय एंव संपर्क बनाया गया, ताकि फसल तैयारी के दौरान कोई समस्या नहीं हो। महिलौंग के किसान भदया महतो कहते है कि उषा मार्टिन के सहयोग से केवल स्ट्रोबेरी से तीन लाख रुपया का लाभार्जन कर चुके हैं। इसी प्रकार मासु गांव के प्रेमनाथ महतो शब्जी एवं नकदी फसल से दो लाख से अधिक कमाया है। उन्होंने बताया कि सीएसआर से जुड़कर अब दिन के साथ रात में भी खेती करते है जानुम एवं अनगड़ा के किसान भी खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े हैं। किसान गांव के स्तर पर अपने खेतीबारी में आत्मनिर्भर हो, इसके लिए कंपनी के माध्यम मासू, अनगड़ा और सिलवई में पाॅलीनेट स्थापित किया गया है, जिससे बीज एवं पौधों के निर्माण में कीटाणु से बचाया जा सके। वर्तमान वित्तीय वर्ष में जल संचयन एवं सौर ऊर्जा के माध्यम से खेतीबारी को बढ़ावा देने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
खेतों में सोलर लाइट की व्यवस्था : ईश्वर महतो
उषा मार्टिन फाॅउंडेशन की ओर से प्रगतिशील किसानों के खेत में सोलर लाइट लगाया गया है। इससे नकद फसल के उत्पादन एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलता मिली है। हेसल के ईश्वर महतो ने बताया कि इससे रात के समय खेती की सुरक्षा के साथ देखभाल में लाभ मिलता है। जानुम के गवर्धन महतो बताते है कि कंपनी की योजना प्रगतिशील किसानों के लिए काफी लाभकारी है। इससे जानवरों से खेत की सुरक्षा होती है।

