
आदिवासी नेता सूर्या नारायण हांसदा की फर्जी मुठभेड़ में हत्या : राज्यपाल से सीबीआई जाँच की मांग

✍️ Arjun Kumar Pramanik
राँची । आदिवासी समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने झारखंड के लोकप्रिय जननेता एवं आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले सूर्या नारायण हांसदा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हत्या को “फर्जी मुठभेड़” करार देते हुए महामहिम राज्यपाल से उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच की मांग की है। दिनांक 10 अगस्त 2025 को गोड्डा जिला पुलिस प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई को लेकर आदिवासी संगठनों का कहना है कि पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से इसे मुठभेड़ का रूप दिया, जबकि हकीकत इससे अलग है।
जगलाल पाहन (समन्वयक, विभिन्न आदिवासी संगठन) ने कहा कि “सूर्या नारायण हांसदा हमेशा शिक्षा, भूमि सुरक्षा, आदिवासी हक-अधिकार और युवाओं के भविष्य की आवाज उठाते रहे। उनका संघर्ष प्रशासन और माफिया तंत्र को खटक रहा था। इसी वजह से उन्हें फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मौत के घाट उतारा गया। यह न केवल मानवाधिकार का हनन है बल्कि लोकतंत्र पर भी हमला है।”
आरती कुजूर (संयोजक ट्राइब फर्स्ट अभियान) ने कहा कि “यह मामला सिर्फ सूर्या नारायण हांसदा का नहीं बल्कि पूरे आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। यदि निर्दोष लोगों की हत्या को प्रशासनिक संरक्षण मिलेगा तो समाज का न्यायपालिका और लोकतंत्र पर से भरोसा उठ जाएगा।”
संगठनों ने महामहिम राज्यपाल से सूर्या नारायण हांसदा की हत्या की सीबीआई/न्यायिक जाँच उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, दोषी पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, मृतक के परिवार पर दर्ज फर्जी मुकदमों को रद्द कर उन्हें सुरक्षा दी जाए, हांसदा द्वारा संचालित विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठाए और परिवार के लिए स्थायी आजीविका की व्यवस्था करे तथा परिजनों को पर्याप्त आर्थिक मुआवजा दिया जाए। आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि मामले की निष्पक्ष जाँच नहीं हुई तो आंदोलनात्मक कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल में जगलाल पाहन, आरती कुजूर, ट्राइब्स फर्स्ट अभियान से रितेश उरांव, केंद्रीय सरना समिति से बबलू मुंडा, जनजाति सुरक्षा मंच से संदीप उरांव, भारत मुंडा समाज से सोनी हेमरोम, आदिवासी रूढ़ि सुरक्षा मंच से रवि मुंडा, बेदिया उत्थान समिति से बुधराम बेदिया, मुखिया मुकेश भगत, सत्यदेव मुंडा, छोटानगपुर आदिवासी सरना समिति से बिरसा पाहन, झारखंड आदिवासी क्रांति सेना से रणजीत उरांव तथा रुक्मणी पहनाईंन शामिल थे।

