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बाल श्रम बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : डालसा

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Arjun Kumar Pramanik…..✍️

रांची :  न्यायामूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा श्री सुजित नारायण प्रसाद के दिशा निर्देश पर एवं माननीय सदस्य सचिव झालसा, कुमारी रंजना अस्थाना एवं माननीय न्यायायुक्त, रांची श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में तथा डालसा सचिव की देखरेख में रेलवे स्टेशन हटिया, रांची में बाल और किशोर मज़दूरी के उन्मूलन के साथ-साथ सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए पूरे भारत में बचाव और पुनर्वास अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एलएडीसी सहायक पंकज कुमार शर्मा, पीएलवी मानव कुमार सिंह, विधि के छात्र अभिनव शरद, पीएलवी मानव कुमार सिंह, पिंकू कुमारी, संगीता सिंह, बबलू कुमार, पवन महली, रातू थाना के सब इंस्पेक्टर, मनोज सोरेन, संजय हेम्ब्रम, मंगल भगत, चाईल्ड हेल्पलाईन एनजीओ के रासबिहारी गुप्ता, गीता लकड़ा, खुदी राम महतो, लक्ष्मी दास, अंजली कुमारी समेत अन्य उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक एलएडीसी पंकज कुमार शर्मा ने कहा कि उक्त विधिक जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल एवं किशोर श्रमिकों तथा सड़क पर रहनेवाले बच्चों की पहचान, बचाव, सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करना है। इसके एवज में एक एक्ट बाल एवं किशोर श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम-1986 के अनुसार, वैसे बालक जो 14 वर्ष से कम है, उनसे किसी भी प्रकार का कार्य कराना प्रतिबंध है। 14 से 18 वर्ष का व्यक्ति जिन्हें खतरनाक कामों एवं उद्योगों में काम करने की अनुमति नहीं है। श्री शर्मा ने लोगों से कहा कि बाल श्रम बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित करता है। उक्त एक्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाल श्रम करानेवाले नियोक्ताओं के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई करना और पहचान कर प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों को दंडित करना भी है।
सचिव
जिला विधिक सेवा प्राधिकार,
रांची

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