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आत्मनिर्भर भारत की राह में सामग्री विज्ञान और एआई की अहम भूमिका, एनआईटी जमशेदपुर में विशेषज्ञ व्याख्यान

 

 

 

रिर्पोटर – जगबंधु महतो

 

 

 

आईआईएम जमशेदपुर स्टूडेंट चैप्टर और एनआईटी जमशेदपुर के संयुक्त सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में सतत विकास, उन्नत विनिर्माण और संसाधनों के पुनर्चक्रण पर हुई चर्चा।

 

 

 

जमशेदपुर : तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और व्यावहारिक कौशल के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना भी है। इसी संदेश के साथ बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को एनआईटी जमशेदपुर में विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामग्री विज्ञान, उन्नत विनिर्माण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।

 

आईआईएम जमशेदपुर स्टूडेंट चैप्टर एवं एनआईटी जमशेदपुर के सोसाइटी ऑफ मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के सहयोग से डायमंड जुबली लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के कक्ष संख्या 312 में आयोजित इस कार्यक्रम में सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. वी.सी. श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत में अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) प्रो. अशोक कुमार और विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एस. चौधरी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।

 

अपने व्याख्यान में डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में विद्यार्थियों को पारंपरिक इंजीनियरिंग ज्ञान के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा विश्लेषण, अनुसंधान और नवाचार की समझ भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने व्यावहारिक दक्षता को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों से निपटने का महत्वपूर्ण आधार बताया।

 

उन्होंने सतत विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से विनिर्माण क्षेत्र को अधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।

 

कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र में हुआ। व्याख्यान ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने तथा देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

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