
घाटशिला : घाटशिला विधानसभा उप चुनाव, एक अनार और सौ बीमार …
दीपक नाग… ✍️

झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्थानीय विधायक सह मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन के कारण घाटशिला विधानसभा का उपचुनाव इस वर्ष के अंत तक होना तय है।
चुंकि, घाटशिला विधानसभा एस. टी. रिजर्व सीट है, इसलिए इस विधानसभा के चुनाव में जीत हासिल करना झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए आन और शान की बात है।
वर्ष २०१८ से झारखंड राज्य में गठबंधन धर्म के तहत भाजपा और झामुमो चुनाव लड़ता रहा है। कांग्रेस पार्टी का समर्थन झामुमो और आजसू पार्टी का समर्थन भाजपा को मिलता रहा । परिणाम स्वरूप झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी के बीच इस विधानसभा में सीधा मुकाबला होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। एक तरफ पार्टी का चुनाव तो होता है तो दुसरी ओर ख्वाहिशों का समाधि भी बनता रहा है ! इसे हम मुहावरे में भी जिक्र कर सकतें हैं।
“एक अनार और सौ बीमार” जानने के लिए यात्रा किजिए मेरे साथ…
झारखंड मुक्ति मोर्चा:-
“एक अनार और सौ बीमार”, पर आलोचना करें तो वर्ष २०१८ और २०२४ में घाटशिला विधानसभा के चुनाव में झामुमो के लिए एक “अनार ….” वाली परेशानी बनी हुई थी । झारखंड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटा बाबुलाल सोरेन जो झामुमो केन्द्रीय महामंत्री हुआ करते थे, पार्टी टिकट लेकर घाटशिला विधानसभा से चुनाव लड़ने का आकांक्षा रखते थे। जबकि टिकट का प्रबल दावेदारी रखने वाले दिवंगत रामदास सोरेन थे । बाबुलाल सोरेन को पार्टी से घाटशिला विधानसभा चुनाव का टिकट देना झारखंड मुक्ति मोर्चा के हाई कमान के लिए मुमकिन नहीं था । यह मामला झामुमो के लिए चिंतित चिंता का विषय होना स्वाभाविक था । झामुमो से विवाद और असंतोष के कारण चंपाई सोरेन और उनके बेटा बाबुलाल सोरेन अपने समर्थकों के साथ वर्ष २०२४ में भाजपा का दामन थाम लिया । बाबुलाल सोरेन का झामुमो से त्यागपत्र देना, दिवंगत रामदास सोरेन के लिए वरदान साबित हुआ । क्यों कि, दुसरा कोई दावेदार अब नहीं रह गया था । इस तरह घाटशिला विधानसभा चुनावी कुरुक्षेत्र में झामुमो के लिए “एक आनार और सौ बीमार” का किस्सा समाप्त हो चुका था।
भारतीय जनता पार्टी:-
भाजपा के लिये “एक अनार और सौ बीमार” का किस्सा घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में आसानी से महसूस किया जा सकता है। घाटशिला विधानसभा से चुनावी टिकट नही मिलने पर, वर्ष २०२४ में भाजपा के पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडु भाजपा छोड़ कर झामुमो का दामन थाम लिया । बाबजूद इसके भाजपा में चुनाव के लिए पार्टी टिकट का ख्वाइश रखने वालों की लिस्ट बरकरार रहा । बाबूलाल सोरेन पुरे बैक-अप के साथ भाजपा में शामिल हुए और वर्ष २०२४ के घाटशिला विधानसभा से भाजपा का प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ा।
जाहिर है इस कारण भाजपा के कुछ टिकट दावेदारों का दिल टूटा । खास करके इस दौड़ में शामिल लखन मार्डी, डाक्टर सुनीता देवदूत सोरेन जैसी प्रबल दावेदार मौजूद है।
खबरों के अनुसार लखण मार्डी और डाक्टर सुनीता देवदूत सोरेन अपने-अपने क्षेत्रों में समय-समय पर जन संपर्क अभियान चलाएं जा रहे हैं । दुसरी ओर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन अपने बेटे बाबुलाल सोरेन को लेकर घाटशिला में राजनितिक गतिविधियां बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है ।
“एक अनार और सौ बीमार” का किस्सा आगामी उप चुनाव में भी भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है । इससे सरासर इंकार करना भी संभव नहीं हैं।
बहरहाल, अनार- बीमार की स्थिति के लिए एक तरफ जहां झामुमो का उप चुनाव के लिए प्रत्याशी का नाम अघोषित तरीके से घोषित हो चुका है, वहीं भाजपा प्रत्याशी का चिठ्ठा इतनी देर में खुलता है कि समर्थकों के साथ – साथ दावेदारी के कतार में खड़े ख्वाइशमंदों का भी उत्साह ही समाप्त हो जाता है।
राजनीति का उंट कब, कहां और कैसे करवट लेगा यह अभी से कहना मुश्किल होगा । समय के अंतराल में परत-दर-परत अनेक प्रश्नों का जवाब स्वत: सामने आ जाएगा।
