
घाटशिला : घरेलू गीले-सूखे कचरे नियमित संग्रहण की समस्या : सक्रिय संवेदना
दीपक नाग …✍️
29 अक्टूबर – घाटशिला शहरी क्षेत्र में घरेलू गीले और सूखे कचरे के नियमित संग्रहण तथा उसके वैज्ञानिक निष्पादन की समुचित व्यवस्था नहीं होने पर सामाजिक मंच ‘सक्रिय संवेदना’ ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंच की ओर से इस संबंध में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को पत्र लिखकर समस्या के स्थायी समाधान के लिए व्यक्तिगत पहल करने का अनुरोध किया गया है।
मंच ने अपने पत्र में कहा है कि पूर्व में इस समस्या के समाधान के लिए आवेदन दिया गया था। इसके बाद जानकारी मिली की उपायुक्त द्वारा जिला पंचायत राज पदाधिकारी और घाटशिला प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन अग्रसारित कर दिया गया है। गत 6 अक्टूबर को समस्या का समाधान कर दिए जाने की सूचना उपायुक्त कार्यालय के मोबाइल मेसेज द्वारा दी गई, लेकिन जमीनी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है। मंच के अनुसार, घाटशिला शहरी क्षेत्र में घरेलू कचरे के नियमित संग्रहण और उसे निर्धारित डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने की व्यवस्था अब भी स्पष्ट नहीं है।

प्रो. मित्रेश्वर ने कहा कि घरेलू कचरे का उचित प्रबंधन केवल सफाई का मामला नहीं, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा बुनियादी प्रश्न है। घरों और बाजारों से निकलने वाले कचरे का समुचित निष्पादन नहीं होने पर गंदगी और प्रदूषण की समस्या बढ़ती है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है। प्रशासन को इस समस्या को प्राथमिकता देते हुए स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि किसी भी शहर में स्वच्छता व्यवस्था का आकलन केवल कागजी कार्रवाई से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों से किया जाना चाहिए। घाटशिला जैसे महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र में प्रत्येक घर से गीले और सूखे कचरे का नियमित संग्रहण, कचरे का पृथक्करण तथा उसे निर्धारित स्थल तक पहुंचाने की व्यवस्था अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इस दिशा में संबंधित अधिकारियों को अपनी पदगत शक्तियों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए।
मंच ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि, वे मामले में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दें, ताकि घाटशिला में घरेलू कचरे के नियमित संग्रहण और निष्पादन की व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
सक्रिय संवेदना ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी भी है। हालांकि, नागरिकों की भागीदारी तभी सार्थक होगी, जब प्रशासन इसके लिए आवश्यक बुनियादी व्यवस्था उपलब्ध कराएगें।
