
घाटशिला : झारखंड लोकतांत्रिक क्रान्तिकारी मोर्चा ने उपचुनाव लड़ने की दी दस्तक…
दीपक नाग… ✍️

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के मसलों को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रान्तिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के शीर्ष कोर कमेटी की एक बैठक सोमवार को तोपचांकी प्रखंड के रामाकुंडा में हुई । यह चर्चा लगभग पांच घंटे तक चली । इस बैठक में कोल्हान के कुछ वरिष्ठ नेता भी मौजूद थें।
यह बैठक पार्टी सुप्रीमो डुमरी के विधायक जयराम महतो की उपस्थिति में हुई। जिसमें यह निर्णय लिया गया कि, होने वाले घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में जेएलकेएम अपने पार्टी प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारेंगे। और चुनाव जीतने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं को हर स्तर पर बढ़-चढ़ कर काम करना होगा। इस बैठक में कुड़मी आंदोलन पर भी अनेक तरह की चर्चा हुई।
इस संबंध में पार्टी के कोल्हान प्रवक्ता महादेव महतो ने बताया कि, इस चुनाव में जेएलकेएम स्थानीय स्थानीय समस्याओं को लेकर चुनाव में उतरेंगे। उन्होंने बताया कि, शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई होगी, जिससे घाटशिला विधानसभा क्षेत्र बुरी तरह त्रस्त है। उन्होंने ने बताया कि, जेएलकेएम चुनाव बिना किसी राजनीतिक ताल-मेल पर अपने दम पर लड़ेगी। एनडीए और इंडिया गठबंधन से एक समान दूरी बरकरार चुनाव लड़ी जाएगी। श्री महतो ने बताया कि, शीघ्र ही पार्टी प्रत्याशी का चयन हो जाए तो पुरे ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे।
बता दूं कि, वानांचल ने पहले से ही समाचारों के माध्यम से पहले ही इशारा कर चुका है कि, कुड़मी आन्दोलन का परिणाम कोई अनिश्चित समिकरण घाटशिला विधानसभा चुनाव प्रस्तुत कर सकते हैं, देखा जा सकता है। यह भी आलोचना की गई थी कि, घाटशिला विधानसभा के उपचुनाव में कुड़मी मत भाजपा और झामुमो के लिए परेशानी बन सकती है।

गौरतलब है कि, एक वर्ष के अंतराल में दो बार कुड़मी रेल टेका आंदोलन को अंजाम देकर कुड़मी समुदाय को एक ही बैनर तले लाने में काफी हद तक सफलता मिली है। परिणाम स्वरूप, कुड़मी समुदाय के मतदाताओं का समर्थन जेएलकेएम को मिलने की ज्यादा संभावनाएं हैं। भले ही सिर्फ कुड़मीओं के वोट से शायद विधानसभा में जीत हासिल करना संभव नहीं पर दंगल में मौजूद प्रतिद्वंद्वी के लिए कम-ज्यादा नुकसान तो कर ही सकतें हैं।
गौरतलब है कि, विगत 2024 के विधानसभा चुनाव मे जेएलकेएम के प्रत्याशी को 8000+ मतदान हासिल की थी । बताया जाता है, यह चुनाव जेएलकेएम ने बहुत ही हल्के तैयारी के लड़े थे। जैसे कि पार्टी के कोर कमेटी में तय हुई है कि, चुनावी मैदान में जरूरत पड़ने वाले हर तरह की, यानी विधानसभा से लेकर बुथ स्तर तक कमेटी बनाकर चुनावी दंगल में शामिल होंगे तो और बेहतर परिणाम हो सकती है।
बहरहाल, चुनाव परिणाम घोषित नहीं होने तक सटिक नापा – नुकसान का गणित सफल होने की दावा करना ठीक नहीं होगा।
