
जीवन की अनुभूति कराता है साहित्य : डाॅ मयंक मुरारी

रांची । प्रदेश के विचारक और लेखक डाॅ मयंक मुरारी ने कहा है कि यह जो बीत रहा है, वो समय नहीं है। वह जिंदगी है। इस बात की अनुभूति कराने का कार्य साहित्य करता है। साहित्य में भी काव्य की धारा जीवन एवं जगत के सूक्ष्म और विराट दोनों को प्रकट करता है। उन्होंने कहा कि साहित्य दुनिया को भले ही न बदले, लेकिन यह दुनिया के बारे में हमारी धारणा को जरूर बदलती है। दुनिया में क्या हो रहा है, उसे बेहतर तरीके से परखने का तरीका बताता है। हमारे जटिल जीवन को जीवंत बनाने और मानवीय स्वर की विविधिता में गीत और लयात्मकता का प्रवेश साहित्य कराता है, जो हमारी जीवन पद्धति से शक्ति लेती है।
समाज की जागरूकता की पहचान है साहित्य : अमोद महेश्वरी
राजकमल प्रकाशन के सीईओ अमोद महेश्वरी ने कहा है कि समाज की जागरूकता की पहचान साहित्य है। अच्छे साहित्य से व्यक्ति, समाज और देश का भला होता है। डाॅ मयंक मुरारी एक मूर्द्धन्य लेखक है। उनकी किताब में प्रेम को एक नये ढंग से परिभाषित किया गया है, जो पाठको को उद्धेलित करेगा। हिंदी साहित्य में विविधिता और विशिष्टता बढ़ती जा रही है। यह बताता है कि भारतीय जनमानस में इसकी स्वीकार्यता बढ़ी है।
डा मयंक मुरारी एक विचारक और सक्रिय लेखक हैं। वह सामाजिकध् व्यक्तिगत विकास के लिए लिखते और काम करते हैं। वह भारत के ज्ञान प्रणाली के आंतरिक मूल्य और अंतर्निहित पहलू पर सोचते हैं और चिंतन करते हैं। उन्होंने 30 सालों में अभी तक 20 किताबें और 700 से अधिक रिपोर्ट, भारतीय समाचार पत्र और पत्रिका में लिख चुके हैं। इन कार्यों के कारण उन्हें कई अवार्ड और पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह उषा मार्टिन में महाप्रबंधक सीएसआर और पीआर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां पिछले 15 सालों से गांवों के टिकाऊ विकास के प्रति संकल्पित है। वह हमारे समाज की सामूहिक जागरूकता के लिए विभिन्न मंचों से व्याख्यान भी देते है।

