
मध्यस्थता अभियान-2 की बड़ी सफलता : 55 लाख के प्राइमरी हेल्थ सेंटर निर्माण विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान

Arjun Kumar Pramanik…..✍️
रांची । राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान-2 के तहत मध्यस्थता केंद्र, रांची में एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक विवाद का सफलतापूर्वक समाधान किया गया। कॉमर्शियल सूट 33/2024, जो वाणिज्यिक न्यायालय रांची में लंबित था, को अधिवक्ता मध्यस्थ ममता श्रीवास्तव एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के संयुक्त प्रयास से सुलझा लिया गया। यह मामला चिरी कुरु, लोहरदगा में एक प्राइमरी हेल्थ सेंटर के निर्माण से संबंधित था। वादी राकेश कुमार (पार्टनर, मेसर्स आर. आर. आर. इंटरप्राइजेज) ने 20.10.2017 को एग्रीमेंट के माध्यम से झारखण्ड स्टेट बिल्डिंग कन्स्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCCL) के साथ निर्माण कार्य का एकरारनामा किया था। समझौते के अनुसार निर्माण कार्य में आए खर्च का भुगतान प्रतिवादी द्वारा किया जाना था। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद आठवां एवं अंतिम बिल का भुगतान नहीं किए जाने से विवाद उत्पन्न हुआ। कुल 55,95,956 रुपये का भुगतान लंबित था, जिसमें वास्तविक लागत एवं निर्माण सामग्री के बढ़े हुए दामों के कारण बढ़ी लागत भी शामिल थी। भुगतान न होने पर वादी ने 21.02.2024 को वाणिज्यिक न्यायालय, रांची में वाद दायर किया। प्रतिवादी की ओर से जेएसबीसीसीएल के एक्सक्यूटिव इंजीनियर रामपाद हांसदा उपस्थित हुए । मध्यस्थता की प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्ष आपसी सहमति से 32,00,000 रुपये में सभी विवादों के अंतिम निपटारे पर सहमत हुए। उक्त राशि प्राप्त होने के पश्चात वादी द्वारा भविष्य में जेएसबीसीसीएल के विरुद्ध किसी प्रकार का दावा, मांग अथवा विवाद नहीं किया जाएगा। इस वाद के सफल समाधान में अधिवक्ता मध्यस्थ ममता श्रीवास्तव तथा दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं — राहुल कुमार दास, खालिदा हया रश्मि एवं आयुष कुमार — का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डालसा सचिव राकेश रौशन ने बताया कि “मध्यस्थता अभियान-2, राष्ट्र के लिए” 01 फरवरी से प्रारंभ हुआ है, जो आगामी 90 दिनों तक चलेगा। इस अभियान के तहत वैवाहिक मामले, चेक बाउंस, दुर्घटना दावा, आपराधिक समझौता योग्य मामले, भूमि अधिग्रहण, बंटवारा, बेदखली, व्यावसायिक विवाद, सेवा संबंधी मामले, श्रम अधिनियम, अनुबंध अधिनियम, उपभोक्ता मामले एवं अन्य उपयुक्त दिवानी मामलों का निस्तारण मध्यस्थता के माध्यम से किया जा रहा है। मध्यस्थता एक सरल, त्वरित और सौहार्दपूर्ण न्याय व्यवस्था है, जो समय और संसाधनों की बचत के साथ आपसी सहमति से समाधान का मार्ग प्रशस्त करती है।

