चांडिल डैम विस्थापितों को बड़ी राहत की तैयारी: पुनर्वास कार्ड, मुआवजा और विशेष कैंप पर बनी सहमति

रिर्पोटर – जगबंधु महतो
विस्थापितों के मुद्दों पर प्रशासन गंभीर: विधायक सविता महतो ने रखीं 19 मांगें, जलस्तर सीमित रखने समेत कई अहम फैसलों पर चर्चा
आदित्यपुर : चांडिल डैम से प्रभावित हजारों विस्थापित परिवारों की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण पहल हुई। आदित्यपुर स्थित सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना प्रशासक कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विस्थापितों के पुनर्वास, मुआवजा, पहचान पत्र और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर गंभीर मंथन किया गया। बैठक में ईचागढ़ विधायक सविता महतो, सुवर्णरेखा परियोजना प्रशासक सह जमशेदपुर उपायुक्त राजीव रंजन, विभागीय अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक में विधायक सविता महतो ने विस्थापितों की ओर से 19 सूत्री मांगपत्र सौंपते हुए कहा कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों का समुचित पुनर्वास पूरा नहीं हो जाता, तब तक चांडिल डैम में जल भंडारण का स्तर आरएल-180 मीटर तक सीमित रखा जाए, ताकि आसपास के गांवों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने विस्थापित युवाओं को रोजगार से जोड़ने, पुनर्वास स्थलों पर सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल सहित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और लंबित विकास पुस्तिका आवेदनों का शीघ्र निष्पादन करने की भी मांग उठाई।
विधायक ने कहा कि विकास पुस्तिका और पहचान पत्र के अभाव में विस्थापित परिवारों को सरकारी योजनाओं तथा बच्चों के विद्यालयी नामांकन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए जल्द ही विशेष शिविर आयोजित कर पात्र लाभुकों को पुनर्वास कार्ड और विकास पुस्तिका उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बैठक को संबोधित करते हुए परियोजना प्रशासक सह उपायुक्त राजीव रंजन ने भरोसा दिलाया कि विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विकास पुस्तिका के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच अंतिम चरण में है तथा प्रथम चरण में आरएल-173 से 175 मीटर तक प्रभावित परिवारों के लंबित मुआवजा और पुनर्वास संबंधी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा।
बैठक में झामुमो के केंद्रीय सदस्य काबलु महतो ने भी विस्थापितों के हित में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस दौरान अपर निदेशक सह संयुक्त सचिव गौतम कुमार भगत सहित सुवर्णरेखा परियोजना के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक से विस्थापित परिवारों में लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान को लेकर नई उम्मीद जगी है।

