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जेल की सलाखों के पीछे योग का संकल्प, लगभग 25 हजार बंदियों ने किया सामूहिक योग

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Arjun Kumar…✍️

रांची । झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के दिशा-निर्देश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची के मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित 40 कोर्ट्स बिल्डिंग के कॉन्फ्रेंस हॉल में योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान राज्यभर के जेलों में लगभग 25 हजार बंदियों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। होटवार जेल के एक बंदी ने कहा, “तीन दिन योग करलिओ, दिमाग कर तनाव हट गेलव बाबू।”
कार्यक्रम में सदस्य सचिव झालसा कुमारी रंजना अस्थाना, न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1, कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश, व्यवहार न्यायालय रांची के अपर न्यायायुक्त, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी, कर्मचारी, मध्यस्थ, अधिवक्ता, मीडियाकर्मी एवं अन्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ तथा संचालन डालसा सचिव ने किया।
अपने संबोधन में कुमारी रंजना अस्थाना ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और मस्तिष्क का विकास होता है। उन्होंने कहा कि योग का प्रादुर्भाव प्राचीन काल से हुआ है और यह शरीर को स्वस्थ रखने का सर्वोत्तम माध्यम है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य के वृद्धाश्रमों, प्रोबेशन होम और शेल्टर होम में रह रहे लोगों ने भी वर्चुअल माध्यम से योगाभ्यास में भाग लिया।
न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए नियमित योग आवश्यक है और इसके माध्यम से अनेक बीमारियों से बचाव संभव है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशिक्षक एवं मध्यस्थ पंचानन सिंह ने उपस्थित लोगों को विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास कराया तथा योग के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा राज्य के विभिन्न स्थानों पर भी योग कार्यक्रम आयोजित किए गए।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जेलों के साथ-साथ वृद्धाश्रमों, प्रोबेशन होम और शेल्टर होम के निवासियों की सहभागिता ने योग को स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन का प्रभावी माध्यम बनाने का संदेश दिया।