
कुकड़ू में फिर जंगली हाथी की दर्दनाक मौत, करंट से गई जान – दलमा कॉरिडोर पर उठे गंभीर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

रिपोर्ट – जगबंधु महतो
चांडिल/कुकड़ू । सरायकेला-खरसावाँ जिले के कुकड़ू प्रखंड में जंगली हाथियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार रात तिरुलडीह और सपारूम गांव के बीच जंगल में एक जंगली हाथी की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर हाथी का शव मिला, वहां बड़े पैमाने पर अवैध बालू भंडारण किया गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका हाथियों का
पारंपरिक कॉरिडोर और ठहराव स्थल है, लेकिन अवैध खनन और ट्रकों की आवाजाही ने उनके रास्ते को बाधित कर दिया है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि अवैध बालू कारोबारियों द्वारा हाथियों को भगाने के लिए करंट युक्त तार लगाए गए हो सकते हैं, जिसकी चपेट में आकर हाथी की मौत हुई। हालांकि, वन विभाग ने प्रथम दृष्टया करंट से मौत की संभावना जताई है और बिजली विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। इस घटना ने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग को पहले से ही अवैध बालू भंडारण और हाथियों की आवाजाही की जानकारी थी, बावजूद इसके न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही एलिफेंट ड्राइव टीम की तैनाती की गई। बिजली विभाग के साथ समन्वय की भी कमी सामने आई है। गौरतलब है कि लगभग एक साल पहले भी कुकड़ू प्रखंड के तुलीनडीह जंगल में एक हाथी के बच्चे की मौत हुई थी। पिछले तीन महीनों में यह तीसरी घटना है, जिससे दलमा कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इस गंभीर मामले को लेकर जिला परिषद सरायकेला की उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने उच्चस्तरीय जांच टीम गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि करंट से मौत की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गैर-जमानती मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि अवैध बालू भंडारण की निष्पक्ष जांच हो और क्षेत्र में आम जनता की
जान-माल, फसल और घरों की सुरक्षा के साथ-साथ जंगली हाथियों के संरक्षण के लिए विभाग तत्काल ठोस कदम उठाए।

