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वरिष्ठ झामुमो नेता विजय महतो ने एक एकड़ में प्योर ऑर्गेनिक खेती कर उपजाई गन्ने की फसल…

सरायकेला संजय मिश्रा:

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सरायकेला। स्वास्थ्य हित से लेकर पूजा परंपरा और मेला परब एवं दोस्तों की महफिल में गन्ने का विशेष महत्व रहा है। परंतु फास्ट फूड के वर्तमान के समय में दांतों से चबाकर गन्ने खाने का परंपरा अब बिरला ही देखा जा रहा है। बावजूद इसके पूजा परंपरा और मला परब में गन्ने का क्रेज बना हुआ है। विशुद्ध गन्ने की फसल को लेकर पूर्व से गन्ने की खेती करते आ रहे वरिष्ठ झामुमो नेता सह झारखंड मुक्ति मोर्चा के गम्हरिया प्रखंड-2 प्रभारी विजय महतो ने अपने खेत के एक एकड़ जमीन पर प्योर ऑर्गेनिक तरीके से इस वर्ष भी गन्ने की खेती स्वयं किसान बनकर की गई है। जिसके स्वाद की तारीफ के साथ मांग भी देखी जा रही है।

गम्हरिया प्रखंड के बांधडीह गांव में अपने निवास स्थान के समीप अपने खेत में की गई उक्त गन्ने खेती के संबंध में विजय महतो ने बताया कि उनके परिवार द्वारा पूर्व से ही देसी खाद की विधि से गन्ने की खेती सहित अन्य फसल उपजाए जाते रहे हैं। जिसका एकमात्र उद्देश्य रहा है कि स्वयं के परिवार सहित इसका सेवन करने वाले अन्य सभी का स्वास्थ्य हित हो सके। और इससे विशुद्ध ग्रामीण परिवेश के अपनेपन का स्वाद भी लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने बताया कि छठ पूजा में उपयोग के साथ-साथ मेला परब और पूजा त्यौहारों के लिए गन्ने की फसल उपजाई जाती रही है।

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