संस्कृति, संस्कार एवं प्रकृति को कागज और रंगों की गहराइयों में संजोने का बेमिसाल प्रयास….
सरायकेला। कोरोना संकटकाल में अपनी पेंटिंग से देश सहित विदेशों में भी धूम मचाने वाले चांडिल प्रखंड के चैनपुर गांव निवासी 18 वर्षीय सौरभ प्रमाणिक इन दिनों चांडिल प्रखंड की प्राकृतिक खूबसूरतियों को अपनी पेंटिंग कला में संजोने एवं समेटने का कार्य कर रहे हैं।
गागर में सागर समाने की उक्ति को साकार करते हुए कैनवास के एक ही चित्र में चांडिल प्रखंड की संस्कृति, संस्कार एवं प्रकृति को समेटने का प्रयास पेंटिंग कला के माध्यम से कर रहे हैं। जिसमें एक ही आर्ट पेपर में चांडिल प्रखंड का प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल जयदा मंदिर, खूबसूरत चांडिल डैम, चांडिल पॉलिटेक्निक कॉलेज, चांडिल जंक्शन, झारखंड के परंपरागत सांस्कृतिक नृत्य, भगवान बिरसा मुंडा और हर दिल अजीज छऊ नृत्य को खूबसूरत रंग देने का प्रयास किया है। सौरभ प्रमाणिक कि उक्त पेंटिंग इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी पसंद भी की जा रही है।
बताते चलें कि मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले सौरभ बचपन से ही पेंटिंग बनाने के शौकीन रहे हैं। पिता किरीटी प्रमाणिक और माता सरस्वती प्रमाणिक इसके लिए उनके प्रेरणास्रोत रहे हैं। सौरभ ने अपने पेंटिंग के शौक को आगे बढ़ाते हुए जमशेदपुर के साकची स्थित रविंद्र भवन में टैगोर स्कूल ऑफ आर्ट्स से फाइन आर्ट्स में डिप्लोमा की शिक्षा हासिल की। और देश एवं विदेशों के पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लिया। शिल्पायन की ओर से आयोजित इंटरनेशनल आर्ट कॉन्टेस्ट 2020 में इन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। राष्ट्रीय स्तर पर एस आर्ट द्वारा आयोजित ई-सर्टिफिकेट ऑनलाइन आर्ट कंपटीशन में इन्हें गोल्डन आर्टिस्ट के अवार्ड से सम्मानित किया गया। राज्य स्तर पर पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग द्वारा वर्ष 2019 में आयोजित प्रतियोगिता में उत्क्रमित उच्च विद्यालय चैनपुर की ओर से भाग लेते हुए इन्हें राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। इसी प्रकार जिला स्तर पर और विद्यालय स्तर पर सौरभ पेंटिंग कला के लिए पुरस्कृत हो चुके हैं। जिन्हें वर्ष 2020 में आर्टिस्ट ऑफ द ईयर घोषित किया गया था। बीते कोरोना संकटकाल के दौरान लॉकडाउन पर बनाए गए पेंटिंग और जागरूकता पेंटिंग को देखते हुए सौरभ को भारतीय कलाकार संघ द्वारा कोविड-19 कोरोना योद्धा राष्ट्रीय सम्मान पत्र से सम्मानित किया गया है।
