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सरायकेला-खरसवां (संजय कुमार मिश्रा) सनातनी हिंदू धार्मिक मान्यता से 22 एवं 23 मई 2021 अतिमहत्‍वपूर्ण दिन है। मोहिनी एकादशी वर्ष 2021 के मई माह में ये दो दिन काफी खास है। यह दिन आज और कल है। 22 और 23 मई दिन शनिवार और रविवार। इस दिन यदि भक्त श्रद्धालु शुद्धता और संयम के साथ मोहिनी एकादशी व्रत का पालन करते हैं तो भगवान श्री हरि विष्णु अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह दोनों दिन भगवान विष्‍णु को समर्पित है। अभी वैशाख माह चल रहा है। वैशाख माह के शुक्‍ल पक्ष के इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। 22 मई को एकादशी ‍त‍िथि प्रारंभ हो जाएगी। भगवान हर किसी की इच्‍छा इस दिन पूरी करते हैं। 22 मई को एकादशी तिथि सुबह 9:19 से शुरू होकर 23 मई के सुबह 6:44 तक है। व्रत खोलने का समय 23 मई के दोपहर एक बजकर 40 मिनट से शुरू होकर शाम 4 बजकर 25 मिनट तक है। पारण‍ तिथि के दिन हरिवासर समाप्‍त होने का समय सुबह 11 बजकर 56 मिनट है।
विष्णु पुराण के अनुसार मोहिनी एकादशी के दिन ही भगवान‍ विष्‍णु ने समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को बचाने के लिए मोहिनी रूप धारण किया था। इस दिन उपवास रखने से पुण्‍य फल की प्राप्ति होती है। और सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है।
व्रती को दशमी तिथि के दिन में एक बार ही सात्‍वि‍क भोजन करना चाहिए। मन से भोग विलास की भावना त्‍यागकर भगवान विष्‍णु का स्‍मरण करना चाहिए। एकादशी के दिन सूर्योदय काल में स्‍नान करके व्रत का संकल्‍प करना चाहिए। षोडषोपचार सहित भगवान श्री विष्‍णु की पूजा करनी चाहिए। भागवत कथा का पाठ करना चाहिए।
हिंदू पंचाग के अनुसार हर साल 24 एकादशियां आतीं है। इन सभी एकादशी तिथियों में मोहिनी एकादशी का विशेष महत्‍व बताया गया है। एकादशी व्रत का वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है। भगवान श्रीकृष्‍ण के कहने पर धर्मराज युद्धिष्ठिर ने एकादशी का व्रत विधिपूर्वक पूर्ण किया था। उन्‍होंने स्‍वयं युद्धिष्ठिर और अर्जुन को एकादशी के महत्‍व के बारे में बताया था। मोहिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होतीं हैं और जीवन में आने वाली समस्‍याओं से मुक्ति मिलती है।
अति शुभ संयोग के साथ आई है इस वर्ष मोहिनी एकादशी:- इस वर्ष मोहिनी एकादशी पर 30 मई रविवार को सूर्योदय के साथ सर्वार्थसिद्धि योग है। साथ ही अमृतसिद्धि योग भी है। उक्त जानकारी देते हुए पंडित नरेंद्र भारद्वाज बताते हैं कि मोहिनी एकादशी के उक्त दोनों दिन सर्वदेव प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त भी बन रहा है।

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