
पटना : “दोनों भाईयों की खुल्लमखुल्ला लड़ाई के गंभीर राजनीतिक संदेश”
संजय कुमार विनित…✍️

बिहार विधानसभा चुनाव में महुआ और राधोपुर विधानसभा क्षेत्र भले ही मोकामा की तरह हिंसक होकर सुर्खियां नहीं बटोर पायी हो, पर लालू यादव के दोनों बेटों के आपसी तकरार से लेकर अब खुल्लमखुल्ला लड़ाई से काफी सुर्खियों में आ गया है। एक ओर, राजद की राजनीति और झंडा के साथ तेजस्वी यादव हैं तो दूसरी ओर पार्टी और परिवार से निष्कासित होकर अपनी नयी पार्टी जनशक्ति जनता दल और जनता की सहानुभूति के साथ तेजप्रताप यादव हैं। आपसी लड़ाई अब अपनी कटुता की चरम सीमा पर है और एक दूसरे को हराने की ओर है। इससे अब चर्चा है कि सियासी खानदान की यह लड़ाई कहीं परिवार की राजनीति पर भारी ना पड जाये।
महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव भी अपने पार्टी और परिवार की लड़ाई में उलझ गए हैं। तेजस्वी यादव राधोपुर से चुनाव लड़ रहे हैं और साथ में पूरी पार्टी और परिवार है लेकिन पार्टी और परिवार से अलग होने के बाद लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को इस चुनाव में अपना दुश्मन मानते हैं और उनके खिलाफ महुआ में जाकर अपने उम्मीदवार के प्रचार के दरम्यान कहा कि कोई अपना पराया नहीं पार्टी ही मां बाप भाई है। इधर तेजप्रताप ने परिवार और पार्टी से निकाले जाने के बाद अपनी अलग पार्टी बना ली है और 2025 के विधानसभा चुनाव के राजनीतिक रणभूमि में उतर चुके हैं। महुआ से तेज प्रताप चुनाव लड़ रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने महुआ में बड़े भाई तेज प्रताप के खिलाफ चुनाव प्रचार किया तो राघोपुर में छोटे भाई तेजस्वी के खिलाफ बड़े भाई तेज प्रताप यादव चुनावी रैली निकाली। राजनीतिक गलियारों में यूं आमने सामने होने की उम्मीद नहीं की जा रही थी। अब तो शब्दों के वाण दोनों ओर से इतने तेज और कर्कश हो गये हैं कि अब खुल्लम खुल्ला लड़ाई शुरू हो गयी है। यानी दोनों भाई एक दूसरे को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने के लिए कमर कस चुके हैं।
दरअसल तेज प्रताप ने बिहार में कुल 43 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें से ज़्यादातर सीटें वे हैं, जो यादव बहुल हैं और आरजेडी जीतती रही है। तेज प्रताप के महुआ से चुनाव लड़ने के कारण राजद के समर्थक भी पशोपेश में पड़ गये हैं। तेज प्रताप, लालू-राबड़ी के बड़े पुत्र हैं। इस कारण राजद समर्थकों की उनके प्रति एक स्वभाविक सहानुभूति है। वे भी समझ रहे हैं कि तेज प्रताप किन परिस्थितियों के कारण अलग दल से चुनाव लड़ रहे हैं। जनमानस में तेज प्रताप के प्रति एक सहानुभूति है और उनके सामने दुविधा की स्थिति है। अभी की स्थिति में राजद का वोट बंटता हुआ दिख रहा है जो आखिरी वक्त में सीन बदल भी सकता है।
यादव बहुल राघोपुर में राजनीतिक समीकरण इस बार थोड़ा बदला हुआ है। 2020 के चुनाव में एनडीए से अलग होने के कारण चिराग पासवान ने अपना उम्मीदवार उतारकर तेजस्वी यादव की राह थोड़ी आसान कर दी थी, लेकिन इस बार वो एनडीए के साथ हैं। बीजेपी ने सतीश यादव पर ही फिर से भरोसा जताया है। खास बात ये है कि सतीश यादव 2010 में जेडीयू उम्मीदवार के रूप में राबड़ी देवी को हरा चुके हैं, ये बात अलग है कि 2015 और 2020 में तेजस्वी यादव से मुकाबले में हार का मुंह देखना पड़ा है। तेज प्रताप यादव ने राघोपुर में प्रेम कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जन सुराज पार्टी से चंचल कुमार मैदान में हैं। एनडीए को इस बार यहां से काफी उम्मीद है, वहीं तेजस्वी यादव के लिए तेजप्रताप यादव का विरोध नुकसान का कारण बन सकता है।
बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद दो बार और राबड़ी देवी दो बार राघोपुर से विधायक रह चुकी हैं, और पिछले दो बार से तेजस्वी यादव राघोपुर से ही विधायक हैं और हैट्रिक की तैयारी में हैं। तेजस्वी यादव की मतदाताओं से अपील होती है कि वे उनको जीत की चिंता से मुक्त कर दें, ताकि वो पूरे बिहार में घूम घूम कर प्रचार कर सकें और मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभा सकें। इधर,तेज प्रताप यादव महाभारत के प्रसंग का जिक्र कर इस लड़ाई को धर्मयुद्ध बता रहे हैं। वे गीता का उदाहरण दे कर कहते हैं, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए यदि अपनों के खिलाफ भी शस्त्र उठाना पड़े तो यह नीतिसम्मत है। धर्मरक्षा की लड़ाई में कोई अपना और सगा नहीं होता। रिश्ते-नाते सब गौण हो जाते हैं।
अब दोनों भाईयों के बीच आन, बान और शान की लड़ाई बन गई है। दोनों भाई एक दूसरे को जिस तरह ललकार रहे हैं, इससे लालू यादव की पार्टी और परिवार की आपसी लड़ाई गंभीर होती जा रही है । खास बात यह है कि ये लड़ाई यादव बहुल क्षेत्रों में गंभीर राजनीतिक नतीजे की तरफ संकेत भी दे रही है। तेजस्वी यादव राधोपुर में लालू परिवार के 7 वीं बार विजयी होने का दंभ भले भर रहें हैं, और दूसरी ओर मां के मन का आशीर्वाद और जनता की सहानुभूति के साथ परिवार और पार्टी से निष्कासित तेजप्रताप यादव रिजल्ट के बाद झुनझुना पकडाने की बात कर रहे हैं। सियासी खानदान की खुल्लमखुल्ला लड़ाई को महागठबंधन के घोषित मुख्यमंत्री प्रत्याशी तेजस्वी यादव के लिए शुभ नहीं कहा जा सकता।
