
बिहार एनडीए : “सीट बंटवारे का फार्मूला तैयार, चुनाव एलान का है इंतजार”

संजय कुमार विनीत… ✍️
(वरिष्ठ पत्रकार सह राजनीतिक विश्लेषक)
बिहार में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए सत्ताधारी पार्टी एनडीए की सीट बंटवारे का फार्मूला तैयार बताया जा रहा है । संभावना है कि जदयू बडे़ भाई के रूप में , भाजपा छोटे भाई के रूप में चुनाव लडे और गठबंधन के दलों को सम्मानजनक सीट पर चुनाव लड़ने को मनाया जा सके । इधर महागठबंधन में भी सीट बंटवारे की प्रयास के लिए बैठकों का दौर जारी है ।
बिहार के पिछले 2020 के चुनाव में बीजेपी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 74 सीटें जीती थीं, जबकि जेडीयू ने बीजेपी से पांच अधिक 115 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह केवल 43 सीटें ही जीत सकी थी। पिछली बार एनडीए में मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी भी थी, जिसे 13 सीटें दी गईं थीं और उसने चार सीटों पर जीत हासिल की थी । पिछले विधानसभा चुनाव में मांझी की पार्टी ने एनडीए के घटक दल के तौर पर सात सीटों पर चुनाव लड़ा था और चार सीटें जीती थी । जबकि उपेंद्र कुशवाहा का समझौता असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ था और उनकी पार्टी ने 99 सीटों पर चुनाव लड़ा था और कोई सीट नहीं जीत सके थे ।
इस बार एनडीए गठबंधन में पांच पार्टियां हैं। बीजेपी और जेडीयू में क़रीब सौ-सौ सीटों के बंटवारे के बाद बची क़रीब चालीस सीटों में बाकी तीन पार्टियों को एडजस्ट किया जाना है । इस लिहाज़ से चिराग पासवान के खाते में 20-25 सीटें आने की बात कही जा रही है । जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की (आरएलएम) को 10-10 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, कुछ सीटों की अदला-बदली के चलते संख्या में मामूली फेरबदल संभव है ।
सवाल यही है कि क्या चिराग पासवान इतनी कम सीटों पर मान गये हैं ? क्योंकि लोकसभा चुनाव में उन्होंने पांच सीटें जीती हैं और इसके हिसाब से उनका दावा तीस सीटों पर बनता है । और निरंतर कम से कम 40 सीट की मांग करते भी रहें हैं । पर सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान को राज्यसभा की एक सीट और विधान परिषद की एक सीट देकर मनाने की बात सामने आ रही है ।
सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद ही एनडीए में सीटों का बंटवारा कर दिया जाएगा । चुनाव आयोग दशहरे के बाद अक्टूवर के पहले या दूसरे सप्ताह में चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा। बताया जा रहा है कि इसके भी दो कारण है । पहला उम्मीदवारों के दल बदल से रोकना और दूसरा मुकेश साहनी (भीआईपी) पार्टी की महागठबंधन से एनडीए में वापसी का इंतजार।
दरअसल, मुकेश साहनी के महागठबंधन में जाने का एक बड़ा कारण था कि उन्हें चुनाव पूर्व ही उपमुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाये । पर महागठबंधन में अबतक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने से भी काग्रेस बचती रही है । कल काग्रेस की सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद भी एनडीए की रणनीति में फेरबदल देखा जा सकेगा। इसलिए भी एनडीए सीट बंटवारे को सार्वजनिक करने से अभी बच रही है ।
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार एनडीए का नया रंग देखने को मिल सकता है । महाराष्ट्र चुनाव की तरह एनडीए एकजुटता की रणनीति को और धार देते हुए सिर्फ चुनाव प्रचार तक ही नहीं बल्कि हर सीट के लिए उम्मीदवार तय करने में भी समन्वय बढ़ाने पर विचार कर रहा है । यानी एक एक उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए सहमति बनाने पर जोर होगा। इसके लिए वरिष्ठ नेताओं की अलग से समिति बनाने पर विचार किया जा रहा है । साथ ही सभी सीटों पर चुनाव अभियान में एकरूपता बनाए रखने के लिए राजग के घटक दलों को मिलाकर चुनाव अभियान समिति बनाने का फैसला हो चुका है । इसे लेकर गृह मंत्री अमित शाह 27 को फिर से पटना आने वाले हैं ।
गठबंधन की राजनीति में सीट बंटवारे का बहुत ही महत्व है और उतना ही महत्वपूर्ण है समन्वय के साथ चुनाव लडना और जीत का प्रयास करना । एनडीए में मुख्यमंत्री को लेकर सहमति है । चिराग पासवान, एनडीए की जरूरत है । एनडीए खेमे में निश्चिंतता यह भी स्पष्ट कर रही है कि यहां आल इज वेल है । बस समय का इंतजार है, सबकी अपनी रणनीति है ।
