
⊄घाटशिला : डा. प्रदीप बलमुचू – ऐसा कोई इरादे नहीं है… अफवाओं का बाजार है तेज

दीपक नाग… ✍️
घाटशिला विधानसभा के उप-पचुनाव परिदृश्य में जितनी मुह, उतनी ही बातें सुनी जा रही हैं। डाक्टर प्रदीप कुमार बलमुचू को लेकर चर्चा तेज है कि, इस बार घाटशिला विधानसभा में होने जा रहें उपचुनाव डाक्टर बलमुचू लड़ेंगे । यह बातें कभी समाचारों में तो कभी हर दस कदम पर मिलने वाले कथित चुनावी विशेषज्ञों के जुबां से सुनी जा रही है।
पर, धरातल में हकीकत कुछ और ही है। जिनके बारे में आलोचनाओं का बाजार गर्म है क्या उनके दिलो-दिमाग में ऐसी कोई बात चल रही है? यह यक्ष्य प्रश्न है। यह बातें उनसे ज्यादा कोई जान या बता सकते हैं क्या जिनको लेकर चर्चा गर्म है ?
घाटशिला विधानसभा के उपचुनाव में अभी जो परिदृश्य सामने है उसमें भाजपा और झामुमो आमने – सामने बराबर मुकाबले में नजर आ रहे हैं। अब जबरन त्रिकोणीय चुनावी दंगल बताने के लिए कोई आधार होने की जरूरत तो है। डाक्टर प्रदीप बलमुचू को तीसरी शक्ति के रुप में चुनावी मैदान में समय-समय पर दिखाया जा रहा है। हां, यह बातें चुनाव आचार संहिता लागू होने के पहले तक संभव हो सकता था कि, डाक्टर बालमुचू कोशिश में लगे हुए है। अब तक भले ही दोनों राजनीतिक पार्टीयां अपने पार्टी प्रत्याशीयों का पर्चा नहीं खोला हो पर प्रत्याशी का नाम फाइनल नहीं किया होगा यह लगता नहीं है ।
डाक्टर प्रदीप कुमार बलमुचू पर काफी दिनों से चल रही बातों की ज़मीनी हकीकत को जानने के लिए डाक्टर बालमुचू से दूर भाष पर बातें हुई कि, चुनावी दंगल में प्रत्याशी के रुप में उतर रहे है या नहीं ? यह भी पुछा गया कि जेकेएलएम पार्टी बैनर तले ? डाक्टर बालमुचू ने ऐसी किसी भी तरह की संभावनाओं से साफ इंकार किया। उन्होंने बताया कि, ऐसी कोई संभावनाएं नहीं है। पत्रकारिता के दृष्टिकोण से हमें दुसरे संबंधित पक्ष का भी मनोभाव जानने की जरूरत है। इसलिए जेकेएलएम पार्टी के कोल्हान प्रवक्ता महादेव महतो से दुर भाष पर बातें हुई। उन्होंने बताया कि, जेकेएलएम की कोर कमेटी का एक बैठक पार्टी के हाई कमान जयराम महतो के साथ जल्दी ही होने वाली है । जिस में घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के संबंध में विस्तारपूर्वक आलोचना की जाएगी, फिर तय किया जाएगा कि, आगे पार्टी को क्या करना है?

गौरतलब है कि, घाटशिला विधानसभा मे झामुमो की जीत के बाद शहरी क्षेत्रों में विकास कार्य विशेषकर सड़कों के प्रति निराशाजनक रही है। जबकि, डा. बालमुचू का कार्यकाल में गांव-देहात से लेकर शहरी क्षेत्रों में विकास कार्य चलता रहा। यही वजह है कि, शहरी क्षेत्रों में डा. बालमुचू को लोग आज भी भुला नहीं सकें है। परिणाम ऐसा है कि, जब कभी घाटशिला विधानसभा में चुनाव होती है तो यहां के शहरी क्षेत्रों लोग डा. बालमुचू को एक बार फिर से देखने की तमन्ना रखते हैं। बहरहाल इंडिया गठबंधन का मामला है। पार्टी निर्णय सर्वोपरि
बहरहाल, इस चुनावी दंगल में अबतक भाजपा और झामुमो के अतिरिक्त तीसरा और कोई मजबूत प्रतिद्वंद्वी कुरुक्षेत्र में नजर नहीं आ रही है। हां, इतना तो कहना लाजमी होगा कि, जेकेएलएम अगर अपने पार्टी प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं तो अपनी जीत सुनिश्चित होगा की नहीं यह कहना कठिन होगा पर, भाजपा और झामुमो के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। लगभग 27000+ कुड़मी मतदाताओं में सेंधमारी होना भाजपा और झामुमो के लिए चिंता दायक हो सकती है। अगर, जेकेएलएम इस चुनाव में प्रत्याशी उतार दे तो भाजपा और झामुमो को जीत हासिल करने के लिए “बालु से तेल निकालने समान” हो सकता है। बहरहाल, भविष्य अभी कल्पना के गर्भ में है ।
