
90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत मंदरो पंचायत भवन में कार्यक्रम आयोजित

Arjun Kumar….✍️
राँची । झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देश पर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची के तत्वावधान में चलाए जा रहे 90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत सोमवार को मांडर प्रखंड के मंदरो पंचायत भवन में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को विभिन्न कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं तथा निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित जानकारी दी गई। इस अवसर पर डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा, पीएलवी गणेश कुमार, सुमन ठाकुर, विनिता कुमारी, सोनी कुमारी, कलिंदर गोप, तालिब अंसारी, दानिश अंसारी तथा विधि के छात्र-छात्राएं तन्नु कुमारी, नेहा कुमारी, स्नेहा, श्रेया श्रीवास्तव, आशी और नंदन कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि जंगलों के लगातार सिमटने और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि हुई है। हाथी, बाघ और तेंदुए जैसे वन्यजीवों के हमलों से प्रभावित लोगों को न्याय, कानूनी सहायता और मुआवजा दिलाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा “मानव-वन्यजीव संघर्ष पीड़ितों के लिए न्याय तक पहुंच योजना-2025” शुरू की गई है। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि इस योजना के माध्यम से प्रभावित परिवारों को कानूनी सहायता, सरकारी मुआवजा योजनाओं का लाभ तथा अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।उन्होंने बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज प्रथा, डायन प्रथा, नशामुक्ति, घरेलू हिंसा, महिला अधिकार, पेसा अधिनियम, लोक अदालत, प्री-लिटिगेशन एवं मध्यस्थता की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों का समाधान आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से किया जा सकता है, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है।राजेश कुमार सिन्हा ने पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा को प्राप्त अधिकारों की चर्चा करते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा स्थानीय संसाधनों के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन की रक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में नालसा के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 की जानकारी देते हुए बताया गया कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकता है। ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर, महिलाएं, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोग निःशुल्क कानूनी सहायता पाने के पात्र हैं। पीएलवी गणेश कुमार ने बाल विवाह और बाल श्रम के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि दोनों सामाजिक बुराइयां बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती हैं तथा कानून के तहत दंडनीय अपराध हैं। सुमन ठाकुर ने वृद्धावस्था पेंशन एवं विधवा पेंशन योजनाओं की जानकारी देकर पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। विनिता कुमारी एवं सोनी कुमारी ने मईयां सम्मान योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए महिलाओं से योजना का लाभ उठाने की अपील की। वहीं कलिंदर गोप और तालिब अंसारी ने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इसका आयोजन 12 सितंबर 2026 को किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में लोक अदालत का लाभ उठाकर अपने लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निपटारा कराने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने विभिन्न कानूनी एवं सामाजिक विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। उपस्थित लोगों को विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क करने की सलाह दी गई।
डालसा, रांची द्वारा संचालित यह 90 दिवसीय अभियान जिले के विभिन्न पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार चलाया जा रहा है, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और कानूनी सहायता की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

