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सरायकेला में बाल संरक्षण तंत्र होगा और मजबूत, डीएलएसए ने विधिक सेवा इकाइयों की समीक्षा कर दिए अहम निर्देश

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रिपोर्टर : जगबंधु महतो

 

लापता व रेस्क्यू बच्चों के मामलों पर जताई चिंता, संस्थागत सुरक्षा, पुनर्वास और त्वरित विधिक सहायता सुनिश्चित करने पर जोर

 

सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिले में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को प्रभावी ढंग से संरक्षित करने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ने महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) के निर्देश पर सोमवार को डीएलएसए कार्यालय में बालकों हेतु विधिक सेवा इकाई (LSUC) तथा मानसिक बीमारी से ग्रसित बालकों हेतु विधिक सेवा इकाई (LSUCMI) की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में बाल कल्याण समिति (CWC), किशोर न्याय बोर्ड (JJB), जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), पारा विधिक स्वयंसेवकों (PLVs) और बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक सशक्त बनाना तथा जरूरतमंद बच्चों तक समय पर निःशुल्क विधिक सहायता, रेस्क्यू, पुनर्वास, परामर्श और संस्थागत संरक्षण सुनिश्चित करना था।

बैठक के दौरान हाल के दिनों में लापता और रेस्क्यू किए गए बच्चों की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। अधिकारियों ने ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई, प्रभावी पुनर्वास और लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर बल दिया। वत्सल्य बालिका गृह से पूर्व में बाहर चली गई दो बालिकाओं के सुरक्षित बरामद होने के मामले की भी समीक्षा की गई तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया।

डीएलएसए ने पारा विधिक स्वयंसेवकों को निर्देश दिया कि वे बाल देखरेख संस्थानों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें और किसी भी प्रकार की उपेक्षा, शोषण, दुर्व्यवहार, बच्चों के लापता होने या अन्य संवेदनशील मामलों की सूचना तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दें। साथ ही मानसिक और मनोवैज्ञानिक सहयोग की आवश्यकता वाले बच्चों को समय पर चिकित्सीय एवं काउंसिलिंग सेवाओं से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।

बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने प्रत्येक बच्चे के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही निर्णय लिया गया कि बालकों हेतु विधिक सेवा इकाई और मानसिक बीमारी से ग्रसित बालकों हेतु विधिक सेवा इकाई की नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि संस्थागत देखभाल, पुनर्वास और बाल संरक्षण संबंधी व्यवस्थाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

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