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भूतिया गांव के जाहेर थान में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया बाहा बोंगा

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बहरागोड़ा संवाददाता – देबाशीष नायक

बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र की भूतिया पंचायत अंतर्गत भूतिया गांव स्थित जाहेर थान में संथाल समुदाय द्वारा पारंपरिक आस्था और उल्लास के साथ बाहा बोंगा पर्व मनाया गया। संताली भाषा में बाहा का अर्थ फूल होता है। यह पर्व खास तौर पर तब मनाया जाता है, जब ‘साल’ के पेड़ों पर नए फूल खिलते हैं, जिन्हें संथाल समाज पवित्र मानता है।
संथाल समुदाय के बीच बाहा पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह त्योहार तीन दिनों तक चलता है और प्रत्येक दिन अलग-अलग परंपराओं का पालन किया जाता है। पुजारी द्वारा पुरुषों और महिलाओं को साल और महुआ के फूल वितरित किए जाते हैं। ढोल, मादल और धमसा की थाप पर पारंपरिक नृत्य-गान के साथ फाल्गुन माह की शुरुआत से अमावस्या तक उत्सव का माहौल बना रहता है।
प्रथम दिन उम नाड़का माहा (पुजारी दिवस)
पहले दिन पुजारी अपने घर के दरवाजे को गोबर से शुद्ध कर अनुष्ठान की शुरुआत करते हैं। इसके बाद वे गांव के पवित्र उपवन जाहेर थान पहुंचकर देवताओं के निवास की स्थापना करते हैं। बोंगा-बुरु के पूजा स्थल की भी विधिवत सफाई की जाती है। रात में पुजारी पूर्वजों और भगवान मरांगबुरु एवं ‘जहेरेनेरा’ की पूजा-अर्चना करते हैं।
दूसरा दिन-सारदी माहाँ
दूसरे दिन ग्रामीण ‘नायके बाबा को नाच-गान करते हुए घर से जाहेर थान तक ले जाते हैं। वहां विधि-विधान से पूजा संपन्न होती है। शाम होते ही महिला और पुरुष मादल और धमसा की थाप पर नृत्य करते हुए नायके बाबा को पुनः घर वापस लाते हैं। पूरे गांव में उत्सव और पारंपरिक उल्लास का वातावरण बना रहता है।
तीसरा दिन आंग राड़ा माहा
तीसरे दिन ‘आंग राड़ा माहा’ के रूप में पर्व का समापन होता है। इस अवसर पर गांव के सभी महिला-पुरुष एकत्र होकर सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं।
इस अवसर पर मुख्य रूप से नायके बाबा (पुजारी) दासमात माण्डी, माझी बाबा सिताराम माण्डी, गोडेत बाबा जान माण्डी, दशरथ हाँसदा, खुदीराम माण्डी सहित भूतिया गांव के सभी ग्रामीण उपस्थित रहे।
बाहा बोंगा पर्व ने एक बार फिर संथाल समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के प्रति उनकी आस्था को जीवंत कर दिया।

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