
देवघर : पैर में पड़ जाए छाले या जितना भी दिक्कतें डाले, रूकेंगे नहीं यह मतवाले…
• जो रास्ते साल के दंश महीने विराम रहता है, सावन और भादो का माह में शिव भक्तों इस राह में चौबिसों घंटे छाये रहते हैं।

• इस राह में सारे शिव भक्त कांवरियां, कांवर यात्रा के दौरान वैराग्य के भेस-भूसे से खुद को ढाल लेते हैं।
• एक सौ किलोमीटर से भी अधिक दुरी तय करने के बाद बाबा बैद्यनाथ को जलाभिषेक करते हैं कांवरियां।
• बोल बम, ऊं नमः शिवाय और बाबा बेड़ा पार लगाएगा जैसी ध्वनि शब्दों से पुरे रास्ता गुंज उठता है।
• आसान नहीं है नंगें पांव सुल्तान गंज से देवघर संकल्पित कलश यात्रा बाबा बैद्यनाथ के द्वार तक पहुंच पाना ।
• आधी दूरी तय करने के बाद सैकड़ों कांवरिया को वाहन का सहारा लेकर बाबा के दरबार तक पहुंच पाते हैं।
दीपक नाग… ✍️
देवघर : हिन्दू सनातन धर्म के अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों में एक ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम है। सभी ज्योतिर्लिंग अलग-अलग नाम और महीमाओं के लिए जाने जाते हैं। जिसमे बाबा बैद्यनाथ धाम दुख और कष्ट से छुटकारा दिलाने के लिए जाना जाता है, इसलिए इन्हें “बाबा बैद्यनाथ” कहा जाता है । बैद्य का अर्थ चिकित्सक होता है ।

वर्ष के इस दो माह शिव भक्त वैराग्य भेष-भूषा के साथ अपनी यात्रा देश के हर प्रांत से आरंभ कर सुल्तान गंज (बिहार) के उत्तर वाहिनी गंगा तट पर पहूंचते है। फिर गंगा मे स्नान कर अपने मन का संकल्प कर साथ में कांवर लेकर निकलते हैं । ऐसी मान्यता है कि, सावन और भादो को बाबा बैद्यनाथ को जलाभिषेक करने से जीवन के सारे संकटों से भोले नाथ रक्षा करते है।


यह यात्रा में “डाक बम” भी जलाभिषेक के लिए पिट्ठू में कलश लेकर चलते हैं । साधारण कांवरियां के लिए बाबा के द्वार तक पहूंचते के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं होती है । पर डाक बम को चौबीस घंटे के भीतर बाबा को जलाभिषेक करना होता है । लगभग एक सौ से अधिक किलोमीटर की दुरी कभी दौड़ कर तो कभी पैदल चल कर पुरा करना पड़ता है । विशेष बात यह है कि, पुरे रास्ते डाक बम न तो मल – मुत्र, न कोई विश्राम और न कोई आराम कर पाते हैं । डाक बमों के लिए सुल्तान गंज के गंगा घाट में सरकार की ओर से काउंटर होती है जहां उन्हें अपना नाम, पता, तारिख और यात्रा आरंभ का समय दिखलाना पड़ता है । यात्रा मार्ग में भी ऐसी ही काउंटर डाक बमों के लिए होती है जहां वे उन्हें यातृरा आरंभ और यहां पहुंचने का समय का कुपन दिया जाता है । बाबा के द्वार पर भी इनके लिए ऐसा ही सरकारी काउंटर व्यवस्थित होता है । जहां देखा जाता है कि, २४ घंटे में डाक बम अपने यात्रा पुरा कर सका कि नहीं ? अगर निर्धारित समय पर डाक बम वाले पहूंच पायें तो उनके लिए बाबा बैद्यनाथ को जलाभिषेक करने के लिए अलग से विषेश व्यवस्था होती है ।

वैसे तो सुल्तान गंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक इन दो महीने रोजगार के लिए लोग खाने ठहरने और प्राथमिक उपचार केन्द्र का व्यवस्था करते हैं । दुसरी ओर संख्या में कम ही सही पर समाज सेवी संस्थाएं और सरकारी नि: शुल्क शिविर भी राह में उपलब्ध रहता है ।
गौर करने वाली बात यह है कि, सावन और भादो की माह में प्रति दिन लाखों श्रद्धालु सुल्तान गंज से बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए इन राहों से गुजरते हैं । परिणाम स्वरूप बिहार और झारखंड राज्य का रेविन्यू श्रद्धालुओं के कारण करोड़ों रुपय का हो जाता है ।
ऐसी अवस्था में जो कमियां कांवरियां को अहसास होता रहा है उन कमियों को दूर कर पुरे व्यवस्था को और भी अधिक दुरुस्त किया जा सकता है ।
कांवरियां बाबा के नाम पर तक़लिफों को सहता आ रहा है और सरकारें आरोपों से बचता रहा है ।
