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तकनीक, प्रशिक्षण और कैश क्रॉप्स का कमाल—अब कम जमीन में ज्यादा मुनाफा

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Arjun Kumar ……✍️

नामकुम(राँची) । कभी परंपरागत खेती पर निर्भर रहने वाले रांची के ग्रामीण इलाकों के किसान अब आधुनिक तकनीक के सहारे अपनी तकदीर खुद लिख रहे हैं। उषा मार्टिन फाउंडेशन की पहल ने 18 गांवों के 25 किसानों की जिंदगी में ऐसा बदलाव लाया है कि वे आज ‘लखपति किसान’ के रूप में नई पहचान बना चुके हैं।
ड्रिप सिंचाई, पॉलीहाउस, सोलर ट्रैप और उन्नत बीज जैसी सुविधाओं ने खेती को न केवल आसान बनाया, बल्कि मुनाफे का जरिया भी बना दिया। पहले जहां किसान मौसम और पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थे, वहीं अब वैज्ञानिक पद्धतियों और बाजार की समझ ने उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया है।
कैश क्रॉप्स से बदली किस्मत
इन किसानों ने पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर स्ट्रॉबेरी, तरबूज, खरबूज, फूल और ग्राफ्टेड टमाटर जैसी नकदी फसलों की खेती शुरू की। नतीजा यह हुआ कि कम जमीन में भी ज्यादा उत्पादन और बेहतर दाम मिलने लगे। एनआरएम को ऑर्डिनेटर मेवालाल महतो बताते हैं कि हाई वैल्यू खेती के जरिए उत्पादन में 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव हुई है। पॉलीशेड में उगाई जा रही सब्जियां—जैसे शिमला मिर्च, खीरा और बैंगन—किसानों को बाजार में बेहतर कीमत दिला रही हैं। प्रशिक्षण ने बदली सोच इस बदलाव के पीछे सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि सोच में आया परिवर्तन भी बड़ी वजह है। फाउंडेशन के सचिव डॉ. मयंक मुरारी के मार्गदर्शन में किसानों को नियमित प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे नई तकनीकों को अपनाने और बाजार से सीधे जुड़ने में सक्षम हुए। किसानों की जुबानी बदलाव की कहानी लुपुंग गांव के सुदीप पाहन कहते हैं कि पहले खेती में मेहनत ज्यादा और आमदनी कम थी, लेकिन अब तरबूज और ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से उनकी आय में बड़ा इजाफा हुआ है। उलातु गांव के दिलीप महतो ने पॉलीहाउस के जरिए खेती को नया रूप दिया। सोलर ट्रैप और उन्नत बीजों ने उनकी फसल को सुरक्षित और लाभकारी बनाया। बेबेड़वारी  गांव के ईश्वर महतो बताते हैं कि ड्रिप सिंचाई और पॉलीशेड तकनीक से उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं।
फलदार पौधों से भविष्य सुरक्षित किसानों ने आम, अमरूद, नींबू, ड्रैगन फ्रूट और एवोकाडो जैसे फलदार पौधों की भी खेती शुरू की है, जो आने वाले वर्षों में स्थायी आय का जरिया बनेंगे। गांवों में दिख रहा असर इस पहल का असर सिर्फ 25 किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि 7 गांवों में खेती को लेकर नई सोच विकसित हुई है। अब अन्य किसान भी आधुनिक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। कंपनी का लक्ष्य—किसान खुशहाल फाउंडेशन से जुड़े एन.एन. झा का कहना है कि कंपनी का सीएसआर पूरी तरह ग्रामीण विकास को समर्पित है और किसानों की खुशहाली के लिए ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। रांची के गांवों में शुरू हुई यह छोटी सी पहल अब एक बड़ी कृषि क्रांति का रूप लेती दिख रही है—जहां तकनीक, प्रशिक्षण और नई सोच ने किसानों को न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उन्हें ‘लखपति’ बनने का रास्ता भी दिखाया है।