
पत्राचार के बाद जागे जिम्मेदार, फिर भी अधूरा सुधार

Arjun Kumar…✍️
अनगड़ा(राँची) । राँची–पुरुलिया पथ निर्माण कार्य एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यह वही सड़क है, जहां नाली के ढक्कनों की जर्जर स्थिति को लेकर पहले लगातार पत्राचार किया गया। पत्राचार के बाद ठेकेदारों की नींद खुली… और जल्दबाजी में कुछ जगहों पर नाली के ढक्कनों को नया बनाया गया। लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सुधार सिर्फ उन्हीं जगहों पर किया गया, जहां ढक्कन पूरी तरह टूट चुके थे या बेहद जर्जर थे । लेकिन उसी नाली के ढक्कन से जुड़े कमजोर नाली का ढक्कन को तोड़कर नही बनाया गया उसकी हालत भी जर्जर है हालांकि अभी टूटा नही है । बाकी जगहों पर आज भी वही पुरानी लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सुधार सिर्फ दिखावे के लिए था?क्या जिम्मेदारों ने अपने कार्य में ईमानदारी की कमी दिखाई है? काम की गुणवत्ता से ज्यादा प्राथमिकता “औपचारिकता निभाने” को दी जा रही है। अगर समय पर पत्राचार नहीं होता, तो क्या यह सुधार भी देखने को मिलता? और अगर सुधार हुआ, तो फिर पूरे प्रोजेक्ट में एक समान गुणवत्ता क्यों नहीं सुनिश्चित की गई? यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जवाबदेही से बचने की कोशिश भी नजर आती है। अब देखना यह होगा कि क्या संबंधित विभाग इस मामले में जिम्मेदारी तय करेगा? क्या ठेकेदारों और अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा? या फिर यह मामला भी कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा? फिलहाल, राँची–पुरुलिया पथ का यह मामला सिस्टम में मौजूद खामियों और लापरवाही की हकीकत को उजागर कर रहा है।
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