
उषा मार्टिन की पहल
गांव में नवनिर्मित्त अखड़ा एवं सामुदायिक भवन का उदघाटन
ग्रामीण विकास के लिए कंपनी का कार्य सराहनीय : राजेश कच्छप

Arjun Kumar Pramanik……✍️
नामकुम(रांची) । उषा मार्टिन अपने ग्रामीण विकास के कार्यों को बेहतर तरीके से जमीन पर उतार रही है। इससे गांव में बदलाव दिखता है। जब ऐसे प्रयास लगातार होते हैं, तो ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी दिखती है। आज यह खुशी दिख रही है। इस प्रयास को आगे बढ़ाना है। उक्त बातें खिजरी विधानसभा के विधायक राजेश कच्छप ने कहीं। वह आज उषा मार्टिन फाॅउंडेशन के तहत नवनिर्मित्त एवं सौंदयीकृत सामुदायिक भवन के उदघाटन अवसर पर बोल रहे थे। सिलवई पंचायत के उलातु डीह और हेसल पंचायत के हेसल जरा में जीर्ण- शीर्ण भवनों का पुनः निर्माण किया गया। इसके अलावा भुवाल टोली में एक अखड़ा एवं तालाब का निर्माण कराया गया है।
खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि जनजातीय समाज के लिए आधारभूत संरचना का विकास ही काफी नहीं है। इसके साथ उनके आजीविका एवं प्रशिक्षण के लिए भी प्रयास करना होगा, ताकि उनको रोजीरोटी के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। अनगड़ा प्रमुख दीपा उरांव ने कहा कि उषा मार्टिन फाउंडेशन के तत्वावधान में गांवों के विकास के लिए कई कार्य किये जा रहे हैं। इससे गांवों के लोगों केा आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग मिलेगा। ऐसे प्रयास और संस्थाओं को भी करना चाहिए। सिलवई मुखिया नूतन पाहन ने कहा कि यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि उषा मार्टिन के प्रयास से विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण लेकर ग्रामीण महिलाएं सशक्त व आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है। हेसल की मुखिया कविता देवी ने कहा कि आज महिलाए उषा मार्टिन फाउंडेशन टाटीसिलवे रांची के प्रयास से प्रशिक्षण लेकर रोजगार प्राप्त कर रही है।
समाजसेवी शैलेश मिश्रा ने कहा कि गांवों के विकास में आधारभूत संरचना की अहम भूमिका है। क्षेत्र में स्कूल का सौंदर्यीकरण, किसानों को तकनीकी ज्ञान एवं महिलाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से बदलाव का प्रयास किया जा रहा है। निर्माण कार्य के संवेदक जितेन्द्र कुमार सिंह व जानकी कंस्ट्रक्शन एंड फेब्रिकेटर ललन कुमार के साथ सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सामाजिक कार्यकर्ता भुनेश्वर महतो, मोनित भूटकुमार, संगीता देवी, मेवालाल महतो, वरुण कुमार, रोशन लिंडा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मुखिया सिलवे नूतन पाहन, पं स स अरविंद लोहारा, हेसल मुखिया कविता देवी, उप मुखिया दुर्गा महतो, समाजसेवी शैलेश मिश्रा, किशन नायक, शाकिर अंसारी, राम टहल चैधरी आदि ने इस अवसर पर अपना विचार व्यक्त किया।
आदिवासी समाज को विकास से जोड़ना लक्ष्य : डाॅ मयंक मुरारी
हुनर सीख महिलाएं बन रहीं है आत्मनिर्भर
उषा मार्टिन फाॅउंडेशन के हेड डाॅ मयंक मुरारी ने कहा कि कंपनी का प्रयास कारखाना के इर्द गिर्द के गांवों में जमीन स्तर पर बदलाव लाना, जनजातीय समाज को उनके परंपरागत संस्कृति की रक्षा करते हुए विकास से जोड़ना है। अखड़ा का निर्माण उसी दिशा में एक प्रयास है। सामुदायिक भवन के माध्यम से गांव के महिलाओं एवं किसानों को विकास परक प्रशिक्षण से जोड़ा जायेगा। पहले चरण में यहां सोहराई और जूट से सामग्री बनाने की कला सीखने पर जोर होगा। गांव की प्रशिक्षित महिलाओं के माध्यम से ही गांव-गांव में यह प्रशिक्षण चलाये जायेगा।
फाॅउंडशेन के हेड डाॅ मयंक मुरारी ने बताया कि प्रशिक्षित महिलाओं ने अपने हुनर और मेहनत से जूट बैग्स एवं अन्य उत्पाद तैयार किए हैं, जिनमें पारंपरिक सोहराय पेंटिंग और विभिन्न स्व-निर्मित डिजाइन उकेरे गए हैं। बैग न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति की पहचान भी दर्शाते हैं। महिलाएँ अपने हाथों से बने जूट उत्पादों के माध्यम से बाजार तक पहुँच बना रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं के लिए तीन जगहों टाटीसिलवे, हरातु और लुपंुग में एवं अलग-अलग समय पर बैच बनाकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिला समूहों ने टेªनिंग के बाद 50 हजार से अधिक की सामग्री बेच चुकी है। सोहराई पेंटिंग अभी तक 20 हजार, ठोंगा 15 हजार, जूट बैग 13 हजार और बांस की सामग्री पांच हजार का बेचा जा चुका है।

