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जमशेदपुर : कुड़मी समाज ने 20 सितंबर से “रेल ठेका-डहर छेका” आन्दोलन की घोषणा…

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∆ वर्ष 2022 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर अंतर्गत खेमा शोली में पांच दिनों तक भारतीय रेल और राष्ट्रीय उच्च मार्ग सेवा को किया था अवरोध…

∆ कुड़मी समुदाय को जनजातीय का दर्जा देने और कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में में शामिल करने के लिए आन्दोलन…

∆ इस बार रेल ठेका-डहर छेका झारखंड के विभिन्न इलाकों में करने की है तैयारी…

∆ भारत के आजादी के बाद 1950 के दौरान कुड़मी जाती को जनजाति समुदाय से अलग किये जाने का आरोप…

∆ अनेक जगहों में कुड़मी समुदाय के लोगों ने अपने मांगों को लेकर मशाल जुलूस भी निकाला है…

∆ सड़क मार्ग को बाधा मुक्त रखा गया ।

दीपक नाग… ✍️

अपने मांगों को लेकर पुरे विश्व में विरोध, प्रदर्शन और अवरोध हमेशा चलता रहा है । जाहिर है, हिन्दुस्तान भी ऐसी आंदोलनों से कभी अछूता नहीं रहा है ‌।

झारखंड राज्य में रहने वाले कुड़मी समाज अपनी पहचान की लड़ाई को लंबे समय से लड़ता आ रहा है । समय के अंतराल में इस लड़ाई को दो कदम आगे बढ़कर सड़कों तक आना पड़ा । इस आंदोलन की खास बात यह है कि इतने अर्से बीतने के बाद भी इनके योद्धा और सहयोगी आज तक पहचान के लिए कोई संज्ञा यानी नाम नहीं दिया है । शायद यही वजह है कि, कुड़मी समाज के अंतर आत्मा के गहराई से जुड़ गया है । यानी समाज के हर एक इंसान खुद को इस रण क्षेत्र में एक सीपाही की तरह महसूस करते रहें हैं ।

इस संबंध में इस आंदोलन के एक नेतृत्व कर्ता स्वपन महातो से दूर भाषा पर मेरी बातें हुई तो उन्होंने ने बताया । झारखंड में कुल तेरह कुड़मी, संथाल, हो, मुंडा, भुमीज, मुंडारी, उंराव वगैरह-वगैरह सन 1950 तक जनजाति समाज में शामिल था पर शोध क्रम कै दौरान कुड़मी समुदाय को जनजातीय परिधि से बाहर कर दिया । श्री महातो ने बता कि, देश आजादी के बाद जब देश का पहली पार्लियामेंट्री बैठक हुई तब समिति ने माना कि, कुड़मी समुदाय को पुनः जनजातीय परिधि में शामिल कर लिया जाएगा, पर आज तक यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है । श्री महातो ने कहा इसी वजह से मजबूरन कुड़मी समुदाय को सड़कों पर उतर कर अपना विरोध प्रदर्शन करना पड़ता है। उन्हें कहा, आगामी 20 सितंबर से झारखंड के दस से ग्यारह अलग-अलग जगहों पर एक साथ भारतीय रेल सेवा को अवरोध किया जाएगा । उन्हें ने बताया, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में रहने वाले तमाम कुड़मी समुदाय के लोगों का इस आंदोलन का समर्थन मिल रहा है । तमाम जगह विरोध प्रदर्शन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

स्वपन महातो ने बताया कि, हमारी पहली कोशिश रेलवे स्टेशन में ही घोषित कार्यक्रम को शान्ति प्रिय तरीकों से अंजाम देने की कोशिश होगी। अगर रेलवे प्रशासन के द्वारा रोका गया तो दूर हट कर रेल “ठेका-डहर छेका” को अंजाम दिया जाएगा । श्री महातो ने कहा, यह विरोध कुड़मी समुदाय शान्ति पूर्ण तरीके से करने जा रहें हैं और उम्मीद भी किया कि, सरकारी तंत्र मामले की गहराई को समझते हुए किसी तरह की अप्रिय भुमिका नहीं निभाएंगे ।

उल्लेखनीय है कि, वर्ष 20 सितंबर’ 2022 से लेकर 25 सितंबर’ 2022 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के अंतर्गत खेमा शोली में पांच दिनों तक भारतीय रेल और राष्ट्रीय उच्च मार्ग सेवा को अवरोध कर रखा था । जिससे, इस राह के आवागमन अस्त-व्यस्त हो गया था । अवरोध जबरर्दस्त तरीके से किया गया था । असंख्य नर-नारी इस आंदोलन में सशरीर उपस्थित थे। इस आंदोलन में अनेक नेतृत्वकर्ता पर मुकदमा भी दायर किया गया था, जो न्याय के अदालत में चल रहा है ।

गौर किया जाए तो झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले मे कुड़मी समुदाय की आबादी कमै-बेसी 27 प्रतिशत है । झारखंड आंदोलन के अलग राज्य आन्दोलन में कुड़मी समाज के अहम् भागिदारी रहा है । इस समुदाय के नेताओं की निर्मम हत्या तक हुई है । जिसमें जमशेदपुर से झामुमो के पूर्व सांसद सुनिल कुमार महातो और उनसे पूर्व झामुमो के केन्द्रीय महामंत्री निर्मल महातो का नाम शामिल हैं ।

बहरहाल, परिस्थितियों से लगता है कि, कुड़मी समुदाय का मामला केन्द्रीय स्तरीय है । शायद केन्द्र सरकार के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने का यही रास्ता चुना गया है । और इसी का नतीजा है कि, भारतीय रेल सेवा को अवरोध करने की तैयारी चल रही है।

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