
पटना : मोदी – नीतीश की आंधी में उड़ गए तेजस्वी – राहुल गाँधी …
संजय कुमार विनित… ✍️

बिहार की पवित्र धरती पर लोकतंत्र के महायुद्ध में जनता ने एक ओर जहाँ बढ़ चढ़ कर मतदान किया, वहीं दूसरी ओर अपने संदेश से नरेंद्र और नीतीश दो भाईयों को आशिर्वाद दिया है और तेजस्वी यादव की ढपोरशंखी वादे और राहुल गाँधी की वोट चोरी के मुद्दे को शिरे से नकार दिया। 243 सदस्यीय विधानसभा में दो शतक के पार कर एनडीए की आंधी में महागठबंधन का सुपडा साफ हो गया है।
इस बार एनडीए की सुनामी शुरुआती रुझानों से लेकर शाम तक एक ही संदेश मिलता रहा कि बिहार ने बीजेपी और जेडीयू वाले एनडीए को फिर सत्ता सौंपने का फैसला किया है। 243 सीटों पर आए रुझानों में एनडीए 200 प्लस की बढ़त के साथ आगे है।अगर यही रुझान नतीजों में बदले तो यह बिहार में एनडीए की सबसे बड़ी जीत होने जा रही है। या कहिये, बिहार की जनता ने जंगलराज, भ्रष्टाचार और परिवारवाद को बिहार की सीमा से बाहर कर दिया है। इसके साथ ही तेजस्वी यादव के तमाम वायदों को ढपोरशंखी बता कर नकार दिया है। वहीं राहुल गाँधी के वोट चोरी के मुद्दे को सिरे से नकार कर नकारात्मक भूमिका को आईना दिखा दिया है।
बिहार के जातीय गणित को देखें तो महागठबंधन कुल मिलाकर 40 फ़ीसदी की ‘जातिगत तालाब’ में से अपने वोट लेता है जबकि एनडीए का वोट कम से कम 50 प्रतिशत का है।तीसरा पिछले कई सालों से एनडीए और ख़ासकर नीतीश कुमार ने महिलाओं के वोटों को अपने पक्ष में करने का सफल प्रयास किया है। महिलाओं और युवाओं ने एनडीए सरकार पर एकबार फिर से अपना विश्वास जताया है और एम वाई समीकरण को मुस्लिम – यादव से महिला – युवा समीकरण में परिवर्तित कर दिया है।
वोट चोरी यात्रा के बाद कांग्रेस को और तेजस्वी यादव के तमाम वायदों से महागठबंधन को लगा था कि उन्हें कहीं ज़्यादा सीटों पर कामयाबी मिलेगी। लेकिन महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार अपनी सीट पर ही बमुश्किल जीत रहे हैं और उपमुख्यमंत्री पद के दावेदार अपनी पार्टी को एक भी सीट दिला पाने में असक्षम रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की पार्टी काग्रेस अपने अबतक का सबसे खराब प्रदर्शन का तगमा ही बटोर पायी और लैफ्ट पार्टियां भी अपने खराब प्रदर्शन के नीचले स्तर पर है।
लेकिन नतीजे पर गौर करें तो नीतीश कुमार ने एंटी-इनकंबेंसी का शिकार होने के बजाय उसे प्रो इनकंबेंसी में बदल दिया और सत्ता में होने का फ़ायदा उठाया। बिहार की जनता ने उनके 20 साल के कार्यकाल को ना सिर्फ सराहा बल्कि उनके सुशासन पर अपनी मुहर लगा दी। बिहार की जनता ने केंद्र सरकार की योजनाओं और प्रधानमंत्री मोदी पर भी जमकर भरोसा किया और एक बार फिर एनडीए सरकार के नारे के साथ हो लिये।
नीतीश कुमार के दसवीं बार मुख्यमंत्री बनना कोई छोटी बात नहीं है। अच्छा होगा कि दूसरी सरकारें भी उनसे सीखें। एक बात तो तय है कि नीतीश कुमार ने जात-पात को किनारे रखकर महिलाओं के लिए योजनाएँ शुरू कीं, जिसका उन्हें बहुत फ़ायदा हुआ। इन योजनाओं में उन्हें प्रधानमंत्री मोदी जी का भी भरपूर साथ मिला। एनडीए के सभी दलों ने पुरे चुनाव में अद्भुत तालमेल और सामंजस्य स्थापित किये रखा, जिससे सभी दलों के प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। एनडीए के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने भी जो रणनीति बनायी और सबने जिस तालमेल के साथ चुनाव मैदान में लडा, उससे ये परिणाम का आना स्वभाविक ही है।
बिहार के मतदाताओं ने जो लोग सीएम नीतीश कुमार के स्वास्थ्य, एनडीए के पिछले दो दशकों के कार्यकाल, पहले जंगलराज के अस्तित्व, प्रधानमंत्री बिहार को कितनी प्राथमिकता देते हैं और गठबंधन पर सवाल उठा रहे थे, इस परिणाम ने इन सभी सवालों का करारा जवाब दिया है । पीएम मोदी ने भी दिल्ली भाजपा आफिस में इस जीत को माताओं और बेटियों की जीत बताते हुए कहा कि लोगों ने तुष्टिकरण से ज्यादा संतुष्टिकरण पर भरोसा जताया और जंगलराज को सिरे से नकार कर विकास को चुना।
फिलहाल, फाइनल परिणाम आने वाकी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार कर रहा है।जहां जदयू अकेले 85 सीटों पर आगे चल रही है, बीजेपी को 89, चिराग पासवान की एलजेपी 19, जीतन राम मांझी की हम को 5 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम को 4 सीटें मिल रही हैं। कुल मिलाकर एनडीए 200 से ज्यादा सीटों पर लीड कर रही है, जो 122 के बहुमत से कहीं ज्यादा है। इधर, महागठबंधन में आरजेडी 25 , कांग्रेस 6, लैफ्ट 3 और आईआईपी 1 सीटों पर आगे चल रही है या जीत चुकी है। एआईएमआईएम 5 सीटों के साथ अच्छे प्रदर्शन को अग्रसर है और जनसुराज पार्टी में शून्य बटा सन्नाटा है, जबकि बीएसपी 1 सीट पर जीत दर्ज करने की ओर है।
