
भा.कृ.अनु.प.-आईआईएबी, राँची में आसपास के गाँवों के वंचित बच्चों के लिए ABOVE द्वारा ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन

Arjun Kumar….✍️
नामकुम(राँची) । ABOVE (एग्री बायोटेक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन फॉर वैल्यू एजुकेशन), जो भा.कृ.अनु.प.-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), राँची की एक छात्र-नेतृत्वित पहल है, ने 2 जून से 11 जून 2026 तक संस्थान परिसर के आसपास स्थित गाँवों के वंचित बच्चों के लिए एक ग्रीष्मकालीन शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस शिविर का उद्देश्य बच्चों में मूल्य आधारित शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, रचनात्मकता तथा जीवनोपयोगी कौशलों का विकास करना था। शिविर का उद्घाटन 2 जून को बोगनवेलिया पौधे में जल अर्पित करने तथा बृहदारण्यक उपनिषद के एक श्लोक के सामूहिक उच्चारण के साथ किया गया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता भा.कृ.अनु.प.-आईआईएबी के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित तथा संयुक्त निदेशक डॉ. विजय पाल भड़ाना ने की। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जयंत लेक तथा शिविर की मार्गदर्शक एवं अंतरराष्ट्रीय न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP) मास्टर ट्रेनर अनीता सिंह भी उपस्थित थीं। अनीता सिंह ने विभिन्न संवादात्मक सत्रों के माध्यम से आध्यात्मिकता और आधुनिक मानसिकता विकास तकनीकों का समन्वय करते हुए बच्चों को अपनी सीमाओं से ऊपर उठने, भावनात्मक रूप से सशक्त बनने तथा जीवन में आत्मविश्वास एवं उद्देश्य विकसित करने के लिए प्रेरित किया। शिविर में शैक्षणिक, प्रेरणादायी एवं अनुभवात्मक गतिविधियों की विस्तृत श्रृंखला आयोजित की गई। 3 जून को प्रसिद्ध रंगकर्मी राजीव सिन्हा ने अभिनय, वाणी अभिव्यक्ति (वॉयस मॉड्यूलेशन) तथा शारीरिक हाव-भाव पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। बच्चों ने उत्साहपूर्वक “मुक्ति” नामक एक लघु नाटक का मंचन किया, जिसमें नशामुक्त जीवन और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
4 जून को प्रतिभागियों ने सीआरपीएफ शिविर का भ्रमण किया, जहाँ अधिकारियों ने बल की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियों तथा अनुशासन के बारे में जानकारी दी। बच्चों ने सुरक्षा बल के जवानों के साथ संवाद किया तथा पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों में उपलब्ध कैरियर अवसरों के बारे में जाना। अधिकारियों ने इच्छुक विद्यार्थियों को इन सेवाओं में प्रवेश हेतु पात्रता मानदंडों एवं तैयारी की रणनीतियों से भी अवगत कराया।
5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बच्चों ने एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया, जिसमें सतत भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया। 6 और 7 जून को प्रतिभागियों ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की राँची इकाई द्वारा आयोजित ध्यान एवं व्यक्तित्व विकास सत्रों में भाग लिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्राचीन भारतीय सिक्कों और मुद्रा नोटों की एक विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसने उन्हें भारत की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। शिविर के अंतिम चरण का संचालन प्रख्यात कलाकार एवं कलाकृति स्कूल ऑफ आर्ट्स के संस्थापक धनंजय कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने बच्चों को झारखंड की पारंपरिक सोहराय कला से परिचित कराया। व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने विभिन्न कलात्मक तकनीकों को सीखा तथा चित्रों और पेंटिंग्स के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
शिविर के अंतिम दिन बच्चों द्वारा तैयार कलाकृतियों की एक प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें उनकी प्रतिभा, सृजनशीलता और उत्साह की झलक देखने को मिली। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय सहभागिता एवं शिविर के सफल समापन के उपलक्ष्य में प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। ABOVE तथा भा.कृ.अनु.प.-आईआईएबी के विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों से यह कार्यक्रम मूल्य आधारित शिक्षा, आध्यात्मिकता, रंगमंच, ध्यान, सांस्कृतिक जागरूकता, कैरियर मार्गदर्शन तथा पारंपरिक कला का एक सफल संगम सिद्ध हुआ। इस शिविर ने बच्चों को एक यादगार एवं समृद्ध शिक्षण अनुभव प्रदान किया तथा उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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