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सतयुग से चली आ रही आस्था की ज्योति: होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

सतयुग काल से मनाया जा रहा होलिका दहन का पावन पर्व हमारी प्राचीनतम सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं में से एक है। यह त्योहार केवल अग्नि प्रज्वलन का उत्सव नहीं, बल्कि सत्य, प्रेम और भक्ति की विजय का प्रतीक है।
पौराणिक कथा के अनुसार, अहंकार और द्वेष से भरी होलिका ने भक्त प्रह्लाद को अग्नि में जलाकर मारने का प्रयास किया। लेकिन हर वर्ष की तरह इस बार भी यह पर्व हमें याद दिलाता है कि घृणा और अन्याय की अग्नि में स्वयं होलिका ही दहन होती है, जबकि सच्ची भक्ति और विश्वास अडिग रहते हैं।
होलिका दहन हमें यह संदेश देता है कि समाज से ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मकता का अंत कर प्रेम, भाईचारा और सद्भाव को अपनाएं।
इसी पावन अवसर पर इचागढ़ वासियों सहित पूरे झारखंडवासियों को होली-फगुआ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ग्राम प्रधान आसनबनी, प्रबोध उरांव ने सभी क्षेत्रवासियों से अपील की है कि होली का पर्व आपसी सौहार्द, शांति और भाईचारे के साथ मनाएँ तथा समाज में प्रेम और एकता का संदेश फैलाएँ।
होली की अग्नि में बुराइयों का दहन हो और हर घर में खुशियों के रंग बिखरें-इसी मंगलकामना के साथ…