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क्वालिटी एजुकेशन पर उषा मार्टिन में कार्यशाला आयोजित

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शिक्षक का कार्य ज्ञान के साथ संस्कार देना है : डॉ. राजीव

✍️ Arjun Kumar Pramanik

रांची । उषा मार्टिन फाउंडेशन के तत्वावधान में “क्वालिटी एजुकेशन” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय था — “शिक्षा में सामाजिक विज्ञान की भूमिका और सृजन एवं संवेदनशीलता के साथ अध्यापन।”

कार्यशाला में राजधानी के शिक्षा विद् डॉ. राजीव कुमार उर्फ बिट्टू ने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, दायित्वबोध और अनुशासन का निर्माण करना भी है। उन्होंने कहा कि भारत को केंद्र में रखकर देखने की दृष्टि विकसित करनी होगी। सफलता क्षणिक होती है, परंतु जीवन की सार्थकता व्यक्ति को अमर बना देती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा — “भोजन खाना एक दृष्टि है, लेकिन भोजन को अन्नपूर्णा मानकर ग्रहण करना भारतीय दृष्टि है।” संविधान ने अधिकार मूलक समाज बनाया है, लेकिन शिक्षा से हमें कर्तव्यबोध एवं प्रेरणामूलक समाज का निर्माण करना होगा।

कार्यशाला में टाटीसिलवे और आसपास के 15 से अधिक सरकारी एवं गैरसरकारी विद्यालयों के शिक्षक शामिल हुए। इसमें महिलौंग की प्राचार्या हेमलता कुमारी, टाटीसिलवे हाई स्कूल के प्राचार्य कमल कुमार, मासू स्कूल के राकेश कुमार, सिलवे से अंकिता अंजलि, चिलदाग स्कूल से मनोज श्रीवास्तव, आरा स्कूल से मरियम प्रतिमा लकड़ा, गुरुकुल स्कूल से पूनम राय, अनगड़ा स्कूल से महली साहेबराम, संत फ्रांसिस स्कूल से राखी अमृता एक्का तथा एकल विद्यालय से आसपति, सरिता देवी और किरण कुमार उपस्थित रहे।

हरएक व्यक्ति अस्तित्व का हिस्सा है : डॉ. मयंक

उषा मार्टिन के महाप्रबंधक डॉ. मयंक मुरारी ने कहा कि भारतीय चिंतन मानव को केवल सामाजिक प्राणी नहीं मानता, बल्कि अस्तित्व का अभिन्न हिस्सा मानता है। विद्यार्थियों को इस ज्ञानबोध से जोड़ने के लिए शिक्षक को आचार्य बनना होगा।

किसानों के बीच 14 हजार गेंदा फूल का पौधा वितरित

कार्यशाला के साथ ही उषा मार्टिन फाउंडेशन की ओर से किसानों के बीच 14 हजार गेंदा फूल के पौधे वितरित किए गए। एग्री-बिजनेस के माध्यम से जीविकोपार्जन और आय संवर्द्धन के उद्देश्य से दस किसानों — ईश्वर महतो, प्रेमनाथ महतो, भदया महतो, अजय हुरूद्वार, निर्मल महतो, राजकुमार महतो, रूबी देवी, फूलमनी देवी, राधिका देवी एवं केदार महतो — को यह पौधे दिए गए।

 

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